कांग्रेस लंबे समय से अपने परंपरागत दलित मतदाताओं के बीच खुद को देखना चाह रही है। शायद ये पहला मौका है जब कांग्रेस के किसी नेता ने इतने साल बाद दलितों और बसपा के संस्थापक कांशीराम को याद किया है।
यूपी की प्रभारी महासचिव प्रियंका गांधी ने बाकायदा ट्वीट कर कांशीराम को उनकी पुण्यतिथि पर याद किया। प्रियंका ने लिखा कि दलितों-वंचितों की आवाज बुलंद करने वाले, भारतीय राजनीति में सामाजिक न्याय की राजनीति के मजबूत स्तंभ एवं संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने वाले मान्यवर कांशीराम जी की पुण्यतिथि पर उन्हें सादर नमन।
प्रियंका की नजर यूपी के दलितों पर है। हाथरस की घटना पर प्रियंका और राहुल का पीड़िता के परिवार से मिलना और ढांढस बंधाना भविष्य का तानाबाना बुन गया है। यूपी से कांग्रेस की जमीन से उखड़ने का बड़ा कारण दलितों का बसपा के प्रति झुकाव और समर्पण रहा है। कांग्रेस उन्हीं दूरियों को पाटने का काम कर रही है। यही कारण है प्रियंका-राहुल के हाथरस दौरे के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के हाथों में भीमराव अंबेडकर के चित्र और जुबां पर जय भीम के नारे थे।
केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के निधन पर भी प्रियंका का ट्वीट पार्टी के अन्य नेताओं की संवेदना से हटकर था। प्रियंका ने लिखा कि रामविलास पासवान जी वर्षों से मेरी मां के पड़ोसी रहे और उनके परिवार के साथ हमारा एक निजी रिश्ता था।
रामविलास पासवान के निधन पर बेटे और एलजेपी अध्यक्ष चिराग पासवान के प्रति कांग्रेस नेताओं की सहानुभूति स्वभाविक है लेकिन बिहार चुनाव में जिस तरह चिराग अलग थलग पड़े हैं। कांग्रेस चुनाव बाद के समीकरण और संभावना को टटोल रही है। पिता के निधन की वजह से चिराग को लोगों की सहानुभूति मिल सकती है। चूंकि चिराग बिहार में भाजपा जदयू गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं ऐसे में कांग्रेस कतई नहीं चाहेगी कि उनका सीधा या खुलकर विरोध करे।