एनसीईआरटी की कक्षा आठवीं की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक को लेकर जारी विवाद के बीच कांग्रेस ने पीएम मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने स्वयं पाठ्यपुस्तकों के पुनर्लेखन के लिए नागपुर सांप्रदायिक पारिस्थितिकी तंत्र का मार्गदर्शन और आकार दिया है (नागपुर कम्युनल इकोसिस्टम फॉर रिराइटिंग ऑफ टेक्स्टबुक्स), जो वास्तविक एनसीईआरटी है। पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से इस पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने की मांग भी की।
कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि पिछले एक दशक में पाठ्यपुस्तकों में वैचारिक बदलाव किए गए हैं और इन्हें ध्रुवीकरण व राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का माध्यम बनाया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने ही ऐसे शैक्षणिक तंत्र को दिशा दी है, जिसने पाठ्यपुस्तकों के पुनर्लेखन को आकार दिया।
कांग्रेस का यह बयान ऐसे समय आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी की कक्षा आठवीं की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक के आगे के प्रकाशन, पुनर्मुद्रण और डिजिटल प्रसार पर पूर्ण रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने पुस्तक में न्यायपालिका पर आपत्तिजनक सामग्री होने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि इससे संस्थान की गरिमा प्रभावित होती है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए पुस्तक की सभी भौतिक और डिजिटल प्रतियों को तत्काल जब्त कर सार्वजनिक पहुंच से हटाने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने एनसीईआरटी निदेशक और स्कूली शिक्षा विभाग के सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि आपत्तिजनक अध्याय शामिल करने के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई क्यों न की जाए।