छप्पन इंच की छाती और स्ट्रॉन्ग मैन की गढ़ी हुई छवि एक मिनट में ढह गई और ढहाने वाले वही युवा थे जिन्हें गटर और दहशतगर्द कहा गया था। कांग्रेस की सोशल मीडिया कमान संभाल रहीं सुप्रिया श्रीनेत ने अमर उजाला के पॉडकास्ट अनम्यूट भारत में कहा कि सबसे बड़ी बात यह हुई है कि लोगों के भीतर का डर खत्म हो गया, और झूठ का कल्चर हमेशा ऊपर से नीचे आता है, नीचे से ऊपर नहीं जाता।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोलते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि आजाद भारत में देश के आंकड़ों पर कभी सवाल नहीं उठे थे। सदन में मंत्री का बयान और सरकार का लिखित जवाब अंतिम माना जाता था, लेकिन अब सरकार आंकड़े छिपा रही है, देर से जारी कर रही है और जो आते हैं, उनकी मैथडोलॉजी तक पर बहस हो रही है। खुद बिजनेस जर्नलिस्ट रह चुकीं श्रीनेत ने इसे भारत की साख के लिए नुकसानदेह बताया।
जेन जी को ज्ञान नहीं, बराबरी का संवाद चाहिए
युवाओं को लेकर उनका कहना था कि जेन जी प्रधानमंत्री से न ज्ञान चाहती है, न मित्रों वाला संबोधन, वह सिर्फ बराबरी का संवाद चाहती है और अपने मुद्दों को गंभीरता से उठाना चाहती है। इसी संदर्भ में उन्होंने प्रधानमंत्री के देर रात जारी वीडियो पर तंज कसा और पूछा कि देश के प्रधानमंत्री को फ्रंट कैमरे से वीडियो बनाने की सलाह आखिर कौन दे रहा है।
स्मृति ईरानी की ट्रोलिंग रुकवाई
श्रीनेत ने किस्सा सुनाते हुए कहा कि अमेठी में हार के बाद जब स्मृति ईरानी को ट्रोल किया जा रहा था तब राहुल गांधी ने सामने आकर कहा, यह गलत है, हार-जीत लगी रहती है और यह ट्रोलिंग बंद होनी चाहिए। इसके बाद ही वह रुकी। उन्होंने कहा, ईरानी ने राहुल के खिलाफ जो कहा और सदन में सोनिया गांधी के साथ जिस तरह पेश आईं, वह सबने देखा है।
गांव के प्रधान जी से लेकर पॉश सोसाइटी के अलग बर्तन तक
जातिगत भेदभाव पर लंबी बातचीत में उन्होंने माना कि वे खुद उस तबके से आती हैं जिसने जाति का दंश नहीं झेला। अपने गांव जंगल जोगिया बारी का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि आरक्षित सीट से चुने गए प्रधान को गांव में नाम से पुकारा जाता था, जबकि पिछले प्रधानों को प्रधान जी कहा जाता था। इसके बाद उन्होंने जानबूझकर उन्हें प्रधान जी कहना और बराबर कुर्सी पर बिठाना शुरू किया। उन्होंने जोड़ा कि यह भेदभाव सिर्फ गांवों तक सीमित नहीं है। दिल्ली और मुंबई की पॉश सोसाइटियों में आज भी घरेलू सहायकों के लिए अलग बर्तन रखे जाते हैं और यह सिलसिला आज तक जस का तस चल रहा है।
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कंगना पर तल्ख तेवर
अभिनेत्री से सांसद बनीं कंगना रनौत पर वे सबसे ज्यादा तल्ख दिखीं। श्रीनेत का आरोप था कि कंगना ने पूरी पीढ़ी को गटर कहा। जब आप किसी को भेड़ियों का समूह कहेंगे तो प्रतिक्रिया तो कहीं न कहीं होगी ही।
महाराजगंज से लड़ने की दिली इच्छा
आगे की राजनीति पर श्रीनेत ने कहा कि उनकी दिली इच्छा महाराजगंज का प्रतिनिधित्व करने की है और वे इसके लिए काम कर रही हैं। उनके पिता हर्षवर्धन इसी सीट से दो बार सांसद और फरेंदा से विधायक रहे।