सियासी जानकार भी मानते हैं कि जब गठबंधन में कांग्रेस को उंगली पर गिनने भर की सीटें दी जा रहीं थीं। तो कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इसका खूब विरोध भी किया। उत्तर प्रदेश में जब कांग्रेस को समाजवादी पार्टी ने ग्यारह सीटों की घोषणा की तो कांग्रेस के नेताओं ने इसका जमकर विरोध किया। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि उनकी पार्टी ने बीते कुछ समय में प्रदेश में मेहनत की है। ऐसे में कम सीटों पर चुनाव लड़ने से कार्यकर्ताओं का मनोबल भी गिरता है। सियासी जानकार प्रभात कुमार कहते हैं कि यह बात सही है कि सियासी तौर पर अगर कांग्रेस अलग चुनाव लड़ती है, तो वह पार्टी के लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। क्योंकि इससे एक तो ज्यादातर सीटों पर चुनाव लड़ने की आजादी मिलेगी। उनका कहना है कि भविष्य के लिहाज से कांग्रेस का नए बने गठबंधन से अलग होकर चुनाव लड़ने में ही ज्यादा सियासी फायदा भी लग रहा है।
कांग्रेस पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता बताते हैं कि अगर उनकी पार्टी अपने पुराने सहयोगियों के साथ ही चुनाव लड़ती है तो उसका ज्यादा सियासी फायदा नजर आ रहा है। उनका कहना है कि बीते साल हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस सभी राज्यों में अकेले ही चुनाव लड़ी थी। इसमें हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में तो कांग्रेस को सरकार बनी। हालांकि बाद में हुए पांच राज्यों में कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ी, जिसमें उसे सियासी तौर पर नुकसान हुआ। उनका कहना है कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा और भारत जोड़ो न्याय यात्रा का आने वाले लोकसभा चुनावों में फायदा मिल सकता है। इसके अलावा उनका यह भी मानना है कि कल अगर चुनाव के बाद गठबंधन की जरूरत पड़ती है, तो अलग-अलग दलों के साथ चुनाव के बाद भी गठबंधन हो सकता है। ऐसे में बेहतर है अगर कांग्रेस पार्टी अलग चुनाव लड़ती है, तो यह उसके लिए एक तरह से संजीवनी का काम करने वाली है। इन परिणामों के आधार पर कांग्रेस अपनी आगे की बड़ी सियासी रणनीति भी तय कर सकती है।