कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लखनऊ में दो अलग-अलग कार्यक्रमों में अलग-अलग बात कहने पर घेरा है। पार्टी का कहना है कि प्रधानमंत्री गरीबी का नाटक बंद कर गरीबों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ न करें।
प्रवक्ता आनंद शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्रोता देखकर भाषण करते हैं। लखनऊ में एक दिन पहले उन्होंने आम जनता के बीच फिर से खुद की गरीबी का हवाला दिया। फिर अगले दिन उद्योगपतियों के सामने बोले कि उन्हें उद्योगपतियों से मिलना अच्छा लगता है।
आनंद शर्मा ने इस बात पर आपत्ति जताई कि उद्योगपतियों से बेहतर संबंध बताने के दौरान प्रधानमंत्री अपनी तुलना महात्मा गांधी से कर बैठे। सच्चाई ये है कि उस दौरान जमला लाल बजाज, जीडी गोयनका जैसे कई उद्योगपतियों ने अंग्रेजों के खिलाफ अपनी जमीनें दान की थीं। मोदी जी देश के पहले प्रधानमंत्री हैं जो इतने अच्छे कपड़े पहनते हैं और दिन में कई बात बदलते हैं। पंडित नेहरू सम्पन्न परिवार से थे बावजूद पीएम बनने के बाद उन्होंने खादी धारण कर ली।
शर्मा ने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री सही मायने में गरीबी से आए थे लेकिन पद की गरिमा बनाए रखी। उन्होंने नरेंद्र मोदी की तरह कभी भी अपनी मां और खुद की गरीबी का हवाला नहीं दिया। डा. मनमोहन सिंह, इंद्र कुमार गुजरात पाकिस्तान से आए हुए रिफ्यूजी थे संघर्ष देखा लेकिन उन्होंने कभी गरीबी की दुहाई या जिक्र नहीं किया। उन्होंने सवाल किया कि आखिर आपने चार सालों में ऐसा कौन सा अनोखा काम किया है जिसके लिए पूरा राष्ट्र आपका अभिनंदन करे।
कांग्रेस ने कहा कि पीएम ने हम पर आरोप लगाने के लिए उद्योगपतियों को चोर और लुटेरे शब्द का इस्तेमाल किया। पार्टी चुनौती देती है कि बताएं कि किस नेता कब ऐसा अपशब्द कहा है।
पीएम उद्योगपतियों से खूब मुलाकात करें, फोटो फ्रेम कराएं, घूमे साथ खाएं पिएं लेकिन उन्हें कष्ट किस बात से हुआ। क्या कांग्रेस ने उन उद्योगपतियों पर सवाल उठाया है जो जनता की कमाई लूट कर विदेश भाग गए हैं। उन उद्योगपतियों की चिंता है जिन्होंने देश को कुछ दिया नहीं बल्कि लूटा है। चार सालों में भाजपा सबसे अमीर पार्टी कैसे बन गई है। उद्योगपतियों के ट्रस्ट में 90 फीसदी रकम भाजपा की है।
कांग्रेस नेता और सांसद अहमद पटेल ने ट्वीट कर कहा है कि पीएम का उद्योगपतियों के साथ खड़ा होना अच्छी बात है। उन्होंने मोदी-शाह पर तंज कसते हुए कहा कि उद्योगपतियों के साथ खड़े होने में केवल दो लोगों के हितों और भारतीय जनता पार्टी की आमदनी बढ़ाने के ख्याल को लेकर नहीं बल्कि देश और युवा के भविष्य के बारे में भी सोचना जरूरी है।