अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले को लेकर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार पर सवाल उठाए हैं। जयराम रमेश ने 105 घटनाओं, 79.85 लाख रुपये की बरामदगी और आठ आरोपियों को लेकर जांच पर सवाल खड़े किए। उन्होंने चंपत राय और अनिल मिश्रा को आरोपी के बजाय गवाह बनाए जाने पर भी सवाल उठाया। कांग्रेस ने निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की है। आइए, विस्तार से जानते हैं कि कांग्रेस ने सरकार पर और कौन से सवाल उठाए...
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला जांच के साथ-साथ राजनीतिक सवालों के बीच से भी गुजर रहा है। कांग्रेस ने जांच को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि मंदिर में चढ़ावे की चोरी की 105 घटनाएं सामने आई हैं। जांच में अब तक 79.85 लाख रुपये की रकम बरामद होने की बात सामने आई है। मामले में आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है। कांग्रेस का सवाल है कि क्या जांच सिर्फ छोटी चोरी करने वालों तक सीमित रहेगी या उन लोगों की जिम्मेदारी भी तय होगी, जिनकी निगरानी में यह सब हुआ।
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कांग्रेस ने एफआईआर में 21 दिन की देरी पर सवाल क्यों उठाया?
जयराम रमेश ने जांच की शुरुआत को लेकर सबसे बड़ा सवाल एफआईआर दर्ज होने में हुई देरी पर उठाया है। उनके मुताबिक, चढ़ावे की रकम चोरी होने से जुड़ा वीडियो 4 जून को चंपत राय तक पहुंचा था। इसके बाद 5 जून को सीसीटीवी फुटेज देखे गए। लेकिन एफआईआर 25 जून को दर्ज हुई। कांग्रेस पूछ रही है कि इन 21 दिनों के दौरान क्या हुआ और इस देरी की पूरी जानकारी देश के सामने क्यों नहीं रखी गई। एफआईआर में आठ लोगों को आरोपी बनाया गया था। जांच के दौरान चंपत राय और अनिल मिश्रा से भी पूछताछ हुई थी। बाद में दोनों ने ट्रस्ट के पदों से इस्तीफा दे दिया था।
105 घटनाओं के बावजूद सिर्फ आठ आरोपी क्यों बनाए गए?
कांग्रेस ने जांच में सामने आई चोरी की घटनाओं और आरोपियों की संख्या को लेकर भी सवाल उठाया है। जयराम रमेश ने पूछा कि अगर सीसीटीवी में चढ़ावे की रकम हटाने की 105 घटनाएं सामने आईं तो मामले में केवल आठ लोगों को आरोपी क्यों बनाया गया। जांच में सामने आए आरोपपत्र के अनुसार, चढ़ावे की रकम निकालने या छिपाने की घटनाएं मंदिर में रकम गिनने के दौरान हुई थीं।
पुलिस ने आठ आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। इनमें अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामशंकर मिश्रा, राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं। जांच में सात आरोपियों से जुड़ी 79.85 लाख रुपये की रकम बरामद होने की बात कही गई है।
चंपत राय और अनिल मिश्रा पर क्या बोली कांग्रेस?
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कांग्रेस का सबसे बड़ा सवाल चंपत राय और अनिल मिश्रा की भूमिका को लेकर है। जयराम रमेश ने पूछा कि दोनों को आरोपी बनाने के बजाय गवाह क्यों बनाया गया। आरोपपत्र में दोनों के साथ मंदिर निर्माण से जुड़े अधिकारी गोपाल राव को भी गवाह के तौर पर शामिल किया गया है। वहीं, जांच में आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है। कांग्रेस का कहना है कि अगर इतनी बड़ी संख्या में घटनाएं हुईं तो केवल चोरी करने वालों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है। उन लोगों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए, जिनकी निगरानी और जिम्मेदारी में चढ़ावे की रकम रखी और गिनी जाती थी। जांच से जुड़े दस्तावेजों में यह भी सामने आया है कि चंपत राय के पूर्व चालक राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के पास मंदिर के दान गिनने वाले कमरे तक पहुंच थी।
कांग्रेस अब किस तरह की जांच की मांग कर रही है?
कांग्रेस ने इस मामले में स्वतंत्र, निष्पक्ष और भरोसेमंद जांच की मांग दोहराई है। जयराम रमेश ने कहा कि जांच सिर्फ रकम बरामद करने और आरोपियों को पकड़ने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। यह भी तय होना चाहिए कि इतनी घटनाएं कैसे हुईं और निगरानी व्यवस्था में कहां कमी रही। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी सवाल उठाया है। पार्टी का कहना है कि मामला करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा है। इसलिए चढ़ावे की पूरी रकम कितनी थी और कितनी चोरी हुई, इसका स्पष्ट जवाब सामने आना चाहिए। जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री से जवाब मांगते हुए कहा कि सत्ता का अहंकार आत्मघाती होता है। वहीं, जांच एजेंसी ने आठ आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर दिया है और मामला अदालत में आगे बढ़ रहा है।