बजट में पेश स्वास्थ्य बीमा योजना को लेकर कांग्रेस ने कई सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि देश के गरीबों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिले लेकिन इसके लिए धन कहां से आएगा और योजना कब शुरू होगी इसे लेकर सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों में ही मतभेद हैं। लेकिन चार साल में मोदी सरकार ये तीसरी स्वास्थ्य बीमा योजना लेकर आई है। गरीब के स्वास्थ्य को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अब जुमला बना डाला है।
कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि सरकार 2016 के बजट में एक स्वास्थ्य बीमा योजना लेकर आई थी। जिसमें कहा गया कि सब गरीबों को एक लाख रुपए तक स्वास्थ्य बीमा देंगे। जबकि दिसंबर 2017 तक न तो उस स्कीम का गठन हुआ न धन आवंटित किया।
मोदी जी 2017 के बजट में फिर एक स्वास्थ्य बीमा योजना लाए जिसमें बीपीएल कार्ड धारकों के लिए कहा गया कि 30 हजार रुपए का बीमा देंगे। एक लाख वाली पिछली स्कीम भूल गए। 2017 की स्कीम में 26 करोड़ 97 लाख बीपीएल कार्ड धारक हैं। 15 सौ करोड़ का आवंटन किया। पांच सौ करोड़ भी खर्च नहीं किया।
एक साल के बाद आउट कम बजट बताता है और 22 करोड़ लोगों को में 21 करोड़ 44 लाख बीपीएल कार्ड धारकों को स्वास्थ्य का कार्ड ही नहीं दिया। अब मोदी केयर के नाम से एक नया झूठ का ढिंढोरा मोदी जी और जेटली जी पीटने का प्रयास कर रहे हैं।
सुरजेवाला का कहना है कि वर्तमान बजट में इस योजना के लिए कोई रकम आवंटित नहीं की गई है। स्वास्थ्य और शिक्षा पर सेस लगाकर धन मुहैया करने की बात कह रहे हैं लेकिन बीमा कंपनियों की प्रीमियम राशि पांच हजार रुपए कम नहीं होगी। अगर बीमा कंपंनियों से इंश्योरेंस नहीं कराएंगे तो सरकार जिम्मेदारी लेगी।
दस करोड़ परिवारों से आधे परिवार आधी राशि भी सालाना लेंगे तो पांच करोड़ परिवार अगर ढाई लाख का क्लेम भी लें तो साढ़े 12 लाख करोड़ रुपया चाहिए। जबकि सेस से उतनी राशि नहीं जुटेगी। देश के लोगों ने बजट को तीन शब्दों में चरितार्थ किया है।
मोदी नॉमिक्स और जेटली नॉमिक्स जोड़कर जुमला नॉमिक्स बनता है। एक ही साल और बचा है इसलिए लोग कहते हैं अच्छे दिन आने वाले हैं क्योंकि मोदी जी तो जाने वाले हैं। मोदी सरकार षडयंत्र के तहत मनरेगा योजना के तहत सौ दिनों की गारंटी स्कीम खत्म करना चाहती है।