कांग्रेस का सेवा दल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को टक्कर देने के लिए देश में 1000 जगह ध्वज वंदन कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी में है। हर महीने के आखिरी रविवार को होने वाले इन कार्यक्रमों में राष्ट्रवाद को लेकर महात्मा गांधी और पं. जवाहरलाल नेहरू के सिद्धांतों की चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम पर अमल के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की मंजूरी का इंतजार है। उम्मीद है कि सोमवार को राहुल की मौजूदगी में इसकी घोषणा की जाएगी।
सेवा दल ने संगठन को फिर सक्रिय करने की रूपरेखा तैयार कर ली है। सेवा दल के मुख्य आयोजक लालजी भाई देसाई ने बताया कि अब सेवा दल पहले की तरह सक्रिय नहीं है। सेवा दल को कांग्रेस के कार्यक्रमों की जिम्मेदारी भी नहीं दी जाती है। हम सेवा दल को दोबारा खड़ा कर पार्टी का सहयोग करने की कोशिश में हैं।
तीन महीने प्रशिक्षण शिविर लगाएगा सेवा दल
देसाई ने बताया कि अगले तीन महीने देशभर में सेवा दल के प्रशिक्षण शिविर लगाए जाएंगे। पहला कैंप 11 जून से मणिपुर में शुरू होगा, जिसमें सेवा दल के स्वयंसेवक और पूर्वोत्तर में कांग्रेस के पदाधिकारी शामिल होंगे। इस समय देश के 700 जिलों और शहरों में सेवा दल की इकाई हैं, जिनमें 20 से 200 तक स्वयंसेवक हैं। सेवा दल की एक युवा इकाई भी शुरू करने की योजना है।
सेवा दल पर अंग्रेजों ने लगाया था प्रतिबंध
सेवा दल की शुरुआत 1 जनवरी, 1924 को एनएस हार्डिकर ने आंध्र प्रदेश के काकिनाडा में की थी। पहले इसे हिंदुस्तानी सेवा दल के नाम से जाना गया। आजादी की लड़ाई में शामिल कांग्रेस के बड़े नेता इसके सदस्य रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू कांग्रेस सेवा दल के पहले अध्यक्ष बनाए गए थे। 1932 में महिला सेना तैयार करने पर अंग्रेज शासकों ने सेवा दल पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसे बाद में वापस ले लिया गया था।