ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर कांग्रेस के सांसद अचानक से संसद सत्र के बीच प्रधानमंत्री आवास के बाहर कैसे जुट गए और धरना शुरू कर दिया? धरने में कौन-कौन शामिल है? इन सांसदों की क्या मांगें हैं? केंद्र की भाजपा सरकार की इस पर क्या प्रतिक्रिया आई है? आइये जानते हैं...
पहले जानें- कैसे बनी पीएम आवास के बाहर जुटने की योजना?
गौरतलब है कि आज संसद के मानसून सत्र का दूसरा दिन है। इसके लिए सुबह से ही कांग्रेस के सांसद लोकसभा और राज्यसभा पहुंचे थे। हालांकि, हंगामे के कारण दोनों ही सदनों की कार्यवाही बार-बार स्थगित हुई। विपक्ष ने बार-बार सीजेपी के प्रदर्शन, नीट पेपर लीक और छात्रों पर हुए बल प्रयोग के मुद्दे को उठाने की कोशिश की। हालांकि, हंगामे और शोरगुल के कारण सदन नहीं चल पाया और दो बजे के करीब दोनों सदनों की कार्यवाही को अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
राहुल गांधी, कांग्रेस नेता
- फोटो : अमर उजाला
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसी दौरान कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने पीएम आवास के घेराव की तैयारी की। पुलिस को सतर्क होने से रोकने के लिए कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने पीएम आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन करने की अपनी योजना को पूरी तरह से गुप्त रखा था। कांग्रेस के सांसदों को भी इस योजना के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई थी।
यह योजना इतनी गुप्त और अचानक थी कि पार्टी के ही कई नेताओं के लिए यह एक चौंकाने वाला घटनाक्रम था। द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, उदाहरण के लिए दिल्ली दौरे पर आए केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन को इसके बारे में तब पता चला जब वह केरल हाउस में थे। इसके बाद वह तुरंत अपने पार्टी सहयोगियों के साथ इस प्रदर्शन में शामिल हुए।
पीएम आवास के बाहर धरने में कांग्रेस के कौन से बड़े नेता शामिल?
पीएम आवास के बाहर हुए धरने और विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस के कई बड़े और प्रमुख नेता शामिल हुए। इनमें राहुल-प्रियंका और खरगे के अलावा कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल, कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, सैयद नसीर हुसैन, चरणजीत सिंह चन्नी शामिल हुए। इन शीर्ष नेताओं के अलावा कई अन्य कांग्रेस सांसद और भारी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता भी इस धरने में शामिल हुए।
क्या है धरने में बैठे कांग्रेस सांसदों की मांग?
1. इस्तीफे की मांग
कांग्रेस नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। राहुल गांधी का कहना है कि छात्रों पर पुलिस की तरफ से किए गए लाठीचार्ज और अत्याचार के लिए सीधे तौर पर गृह मंत्री जिम्मेदार हैं और चूंकि वे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करते हैं, इसलिए दोनों को इस्तीफा देना चाहिए। इसके अलावा, नीट और अन्य परीक्षाओं के पेपर लीक मामलों के कारण शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी लगातार मांग की जा रही है।
2. संसद में चर्चा
कांग्रेस सांसद चाहते हैं कि नीट पेपर लीक और सीबीएसई की मार्किंग में हुई गड़बड़ियों के मुद्दे पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं के मुद्दे पर संसद में बात हो। साथ ही सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस की बर्बरता के विषय पर भी संसद में एक विस्तृत चर्चा हो।
3. जवाबदेही और माफी
सांसदों और नेताओं मांग है कि सरकार और विशेष रूप से प्रधानमंत्री इस पूरी पुलिसिया कार्रवाई की जिम्मेदारी लें। राहुल गांधी ने यह भी मांग की है कि प्रधानमंत्री को छात्रों पर हुए इस बल प्रयोग के लिए उनसे माफी मांगनी चाहिए।
केंद्र की भाजपा सरकार की इस पर क्या प्रतिक्रिया आई है?
केंद्र की भाजपा सरकार ने विपक्ष और प्रदर्शनकारियों द्वारा की जा रही इस्तीफे की मांगों पर अब तक कोई सहमति नहीं दी है। हालांकि, सरकार ने इस पूरे मुद्दे पर बातचीत के लिए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह को भेजा।
उन्होंने राहुल से मुलाकात के बाद कहा कि संसद में नीट पेपर लीक और इससे जुड़े आंदोलन की चर्चा की कांग्रेस की मांग को मान लिया गया है। लेकिन राहुल ने अपनी शर्तें बदल लीं। राहुल अब शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अड़े हैं। उन्होंने कहा कि राहुल का अपनी शर्तों से मुकरना ठीक नहीं है। कांग्रेस ने इन मुद्दों पर चर्चा के लिए कोई नोटिस नहीं दिया।