सीबीआई के अफसर इस बारे में कुछ भी नहीं कहना चाहते। सीबीआई के प्रवक्ता से कई बार संपर्क करने के बाद भी सफलता नहीं मिल सकी। वहीं सीबीआई के प्रसीक्यूशन विंग में काम कर चुके विधि एवं कानून मंत्रालय के संयुक्त सचिव के अनुसार जांच एजेंसी द्वारा जारी इंटरपोल की लुक आऊट नोटिस में आसानी से बदलाव संभव नहीं है। सूत्र का कहना है कि सीबीआई कोई एफआईआर आधार मिलने पर दर्ज करती है और किसी तरह के बदलाव के लिए इंस्पेक्टर स्तर के व्यक्ति को भी बाकायदा अनुमति लेनी पड़ती है।
कांग्रेस का आरोप
जब विजय माल्या को दो बैंको ने डिफाल्टर घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी, सीरियस फ्रॉड इनवेस्टीगेशन, सीबीआई, ईडी ने मामला दर्ज कर लिया था तो वह वित्तमंत्री से मिलकर और उन्हें लंदन जाने की सूचना देकर कैसे अगले दिन दो मार्च 2016 को देश छोडक़र भाग गया?
जुलाई 2015 तक विजय माल्या सात हजार करोड़ रुपये के कर्जदार थे। 29 जुलाई 2015 को सीबीआई ने उनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की थी। 10 अक्टूबर 2015 को विजय माल्या के आवास और ठिकाने पर छापा मारा था। सीबीआई ने तमाम दस्तावेज, इलेक्टानिक उपकरण आदि जब्त किया था। इन सभी तथ्यों की छानबीन के बाद 16 अक्टूबर 2015 को सीबीआई ने लुकआऊट नोटिस जारी किया था। इस नोटिस में माल्या को देखने के बाद गिरफ्तार करने का प्रावधान था, लेकिन किसके दबाव में जांच एजेंसी ने 23 नवंबर 2015 को गिरफ्तारी जैसा प्रावधान हटाकर केवल सूचना(डिटेन से रिपोर्ट) देने का बदलाव कर दिया।
कांग्रेस का आरोप है कि 19 अगस्त 2014 को एसबीआई ने माल्या को विलफुल डिफाल्टर का नोटिस थमा दिया था। एक अन्य बैंक ने 1 नवंबर 2014 को विलफुल डिफाल्टर घोषित किया था। वह सीबीआई, ईडी, एसएफआईओ के रेडार पर थे और इसके बाद भी माल्या वित्त मंत्री को बताकर लंदन भाग गए।
रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि मामला वित्त मंत्री अरुण जेटली तक सीमित नहीं है। सीबीआई प्रधानमंत्री कार्यालय के अधीन आती है। सीबीआई और पीएमओ को बताना चाहिए कि लुकआऊट नोटिस में ढिलाई का आर्किटेक्ट कौन है? किसने विजय माल्या को विदेश भागने के लिए अवसर दिलाया? कौन सीबीआई, ईडी, एसएफआईओ के जरिए माल्या की मदद कर रहा था? सुरजेवाला ने कहा कि इस मुद्दे पर भाजपा को इधर उधर की बात करने, जलेबी बनाने से बाज आना चाहिए। जेटली जी को झूठ बोलने से बचना चाहिए। उन्हें बताना चाहिए उन्होंने जांच एजेंसियों को माल्या को गिरफ्तार करने की सूचना देने के बजाय उन्हें विदेश क्यों भागने दिया?
झूठ बोल रहे हैं वित्त मंत्री जेटली- कांग्रेस
सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सांसद पीएल पुनिया को गवाह के तौर पर पेश किया है। पीएल पुनिया कांग्रेस के सांसद हैं। वह कह रहे हैं उन्होंने विजय माल्या और अरुण जेटली को संसद के केन्द्रीय कक्ष में खड़े-खड़े और फिर बेंच पर बैठकर बात करते देखा था। पूनिया दावा कर रहे हैं कि इसकी सीसीटीवी से जांच करा ली जाए। वह दिन और तारीख भी बता रहे हैं। इतना ही नहीं पूनिया दावा कर रहे हैं, उनकी बात झूठ साबित होने पर वह(पूनिया) राजनीति से सन्यास ले लेंगे। सुरजेवाला के अनुसार विशेष श्रेणी का दर्जा प्राप्त सांसद पूनिया बड़े दलित नेता हैं। वह उ.प्र. सरकार के मुख्य सचिव और जिम्मेदार व्यक्ति रहे हैं। इसके बाद आखिर सरकार को क्या चाहिए?
भाजपा के आरोप पर कांग्रेस
सुरजेवाला ने केन्द्रीय रेलमंत्री पीयुष गोयल को आड़े हाथों लिया। सुरजेवाला ने कहा कि पीयुष गोयल एसबीआई से विजय माल्या को लोन देने को लेकर जो आरोप लगा रहे हैं, उन्हें याद होना चाहिए कि वह उसी एसबीआई बैंक के उन दिनों (2005-2008) तक निदेशक रहे हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी का विदेश जाना और उनका वहां लोगों से मिलना किसी अपराध की श्रेणी कैसे आ सकता है। यह भाजपा जानबूझकर ध्यान भटकाने के लिए कर रही है। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद जानबूझकर मुद्दे को घुमा रहे हैं। सुरजेवाला ने रविशंकर प्रसाद पर हमला बोलते हुए कहा कि उनका उद्योगपति परिवार की वकालत करने का इतिहास रहा है। वह अनिल अंबानी और सुब्रत राय सहारा के भी वकील रहे हैं। वह बेबुवियाद आरोप लगा रहे हैं। इसी तरह से पार्टी के प्रवक्ता सांबित पात्रा के आरोपों को भी कांग्रेस ने निराधार, भ्रामक, मामले पर पर्दा डालने वाला बताया।