कांग्रेस पार्टी ने मंगलवार को एक प्रेसवार्ता में आरोप लगाया है कि पीएम नरेंद्र मोदी ने देश के 130 करोड़ लोगों पर प्रति व्यक्ति 23,300 रुपये के अतिरिक्त कर्ज का बोझ डाल दिया है। मोदी सरकार के चार साल नौ महीने के कार्यकाल में यह बोझ पड़ा है। पार्टी नेता रणदीप सुरजेवाला का कहना है कि मार्च 2014 में 40,854 रुपये कर्ज था जो कि दिसंबर, 2018 में बढ़कर 64,154 रुपये हो गया है। वित्त मंत्रालय के सनसनीखेज आंकड़े यह दर्शाते हैं कि मोदी सरकार ने मात्र चार साल नौ महीने के कार्यकाल में (मार्च, 2014 से दिसंबर, 2018 तक) 30,28,945 करोड़ का कर्जा लेकर देशवासियों को कंगाल बनाने का घिनौना षडयंत्र किया है।
सुरजेवाला ने कहा, पिछले 70 साल में यानि मार्च, 2014 तक देश पर 53,11,081 करोड़ रुपये कर्ज था। चार साल नौ महीने के बाद कर्ज की यह मात्रा 57 प्रतिशत बढ़ गई। दिसंबर, 2018 में यह कर्ज 83,40,026 करोड़ रुपये हो गया है। यानी क़र्ज में 30,28,945 करोड़ की बढ़ोत्तरी हो गई है। इससे साफ हो गया है कि मोदी ने कर्ज लेकर पैसा लुटाया और अर्थव्यवस्था का बंटाधार किया।
आजीविका के संकट से जूझते देश के हर व्यक्ति को मोदी ने अपने वित्तीय कुप्रबंधन, प्रचार प्रसार व चुनिंदा उद्योगपति मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए कर्जदार बना डाला। देश के 130 करोड़ देशवासियों पर मोदी ने प्रति व्यक्ति 23,300 का अतिरिक्त कर्ज का बोझ केवल चार साल नौ महीने की सरकार में डाल दिया है। मार्च 2014 में 40,854 से बढ़कर दिसंबर, 2018 में 64,154 रुपये का कर्ज हो गया है।
कांग्रेस नेता ने कहा, चौंकाने वाली बात यह भी है कि दिसंबर, 2018 से मार्च, 2019 के बीच लाखों करोड़ का बेतहाशा और अनाप-शनाप कर्ज मोदी सरकार ने लिया है। सार्वजनिक पटल पर जानकारी के मुताबिक मार्च, 2019 तक मोदी सरकार ने 7,16,700 करोड़ का अतिरिक्त कर्ज लिया है और देश का कुल कर्ज बढ़कर, 90,56,725 करोड़ हो गया है।
जानबूझकर और षडयंत्रकारी तरीके से दिसंबर, 2018 से मार्च, 2019 के बीच लिए कर्ज का डेटा वित्त मंत्रालय और मोदी सरकार ने जनता को नहीं बताया। कांग्रेस नेता ने कहा, असुविधा वाले डेटा को छिपाने का आदतन अपराध करना मोदी सरकार की पुरानी आदत है।
आज तक न तो मार्च, 2019 तक कर्ज का डेटा बताया और बेरोजगारी, पोषण, विदेशी निवेश, किसानों की आत्महत्या और महिला अपराध का डेटा आदि बार-बार छिपाए गए।