केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देकर 1993 में अधिगृहीत अयोध्या की 67 एकड़ जमीन को गैर-विवादित बताते हुए इसे इसके मालिकों को लौटाने की अपील की है। कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे पर एक बार फिर भाजपा पर हमला बोल दिया है। पार्टी प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी का कहना है कि यह मामला तो 31 मार्च 2003 का है।
सुप्रीम कोर्ट ने 16 साल पहले यह आदेश पारित किया था कि जब तक मंदिर का फैसला नहीं हो जाता, तब तक आसपास की जमीन पर यथास्थिति बनी रहेगी। हैरानी की बात यह है कि भाजपा को 16 साल बाद अब अर्जी देना कैसे याद आ गया। उन्होंने सवाल किया है कि चुनाव सिर पर हैं, अपनी लाज बचाने के लिए क्या भाजपा ऐसा कर रही है।
बता दें कि केंद्रीय मंत्री जावड़ेकर ने मंगलवार को एक प्रेसवार्ता में कहा, सरकार ने एक बड़ा फैसला किया है। अयोध्या में विवादित भूमि के पास अधिगृहीत 67 एकड़ जमीन उनके मूल मालिकों को वापस करने की अनुमति लेने के लिए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। केंद्र की ताजा पहल को पूरी तरह संवैधानिक बताते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा, संवैधानिक बेंच ने ही यह कहा था, सरकार को निर्णय करना है कि जो बाकी जमीन है उसका क्या किया जाए। ऐसे में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से यथास्थिति के आदेश को बदलने का अनुरोध किया है।
मंदिर पर फिर से कांग्रेस-भाजपा आमने सामने
केंद्रीय मंत्री जावड़ेकर ने कहा, राम जन्मभूमि न्यास ने 2003 में अपील की थी, लेकिन 10 साल कांग्रेस का राज था। उन्होंने इस पर कुछ नहीं किया। अब मोदी सरकार कर रही है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि चुनावी राजनीति की कोई बात नहीं है। रोज सुनवाई होने को पहले प्राथमिकता में रखा गया था लेकिन 5-6 महीने ऐसे ही निकल गए, इसलिए सरकार ने यह पहल की है।
दूसरी ओर, कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी बोले, सुप्रीम कोर्ट ने 16 साल पहले यथास्थिति का आदेश पारित किया था। अब कैसे भाजपा को अर्जी देने की याद आ गई। कांग्रेस पार्टी चाहती है कि इस विवाद का हल अदालत के फैसले के अनुसार हो।