उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के इस्तीफे और राज्य में राजनीतिक उठापटक पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया जताते हुए राष्ट्रपति शासन लगाने और नई सरकार चुनने के लिए जनता के बीच जाने की मांग की है। कांग्रेस के उत्तराखंड प्रभारी देवेंद्र यादव का कहना है कि मुख्यमंत्री से इस्तीफा लिया जाना इस बात की पुष्टि करता है कि भ्रष्टाचार में लिप्त और राज्य के विकास में भाजपा सरकार फेल हुई है।
भाजपा सरकार ने चार साल में इतने घोटाले किए जिसका इस्तीफे के रूप में पटाक्षेप हुआ है। इस्तीफा सरकार के चार साल के भ्रष्टाचार और उसकी नाकामियों पर पर्दा डालने की कोशिश है।
यादव ने कहा कि नैनीताल हाईकोर्ट ने कुछ महीने पहले ही इसी त्रिवेंद्र सरकार के खिलाफ ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। उस समय भी सीएम ने अपनी जिम्मेदारी न समझते हुए मामले को सुप्रीम कोर्ट में फैसले को चुनौती दी और स्टे की कोशिश की। उनका कहना है कि उत्तराखंड में बेरोजगारी की 26 प्रतिशत है।
राज्य के लोगों को गांवों में मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही है इसी कारण पलायन बढ़ रहा है। कुंभ घोटाला, फारेस्ट घोटाला, मिड डे मील घोटाला और गबन सामने सामने आए हैं। राज्य की जनता सवाल पूछती है कि जिसे चार साल पहले लोगों ने उम्मीद केसाथ चुना था फेल साबित हुई है।
वरिष्ठ नेता धीरेंद्र प्रताप का कहना है कि मुख्यमंत्री ने बोया पेड़ बबूल का तो आम का कहां से हो। चार सालों में उन्होंने जिस तरह जनता के साथ धोखा दिया है उसी का नतीजा है कि देश में वे सबसे निकम्मे मुख्यमंत्री साबित हुए हैं।