लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी को सत्तापक्ष के छह शहजादों का नाम याद आ रहा है। ये सभी शहजादे खास तो हैं ही, मगर इनमें एक समानता भी है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने जब इनका नाम लिया है तो उन्होंने यह भी बता दिया कि ये सब एक जैसे क्यों हैं।जिनके ये शहजादें हैं, उनमें छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, हिमाचल प्रदेश के पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और राष्टीय सुरक्षा सलाहकार अजीत दोभाल शामिल हैं। रही बात समानता की तो सब पर कोई न कोई आरोप लगा है।
जयराम रमेश ने दो दिन पहले एक प्रेसवार्ता में साफ तौर पर कह दिया था कि भाजपा में तो कलाकार बेटों की कोई कमी नहीं है। दरअसल, उन्होंने यह बात भ्रष्टाचार के आरोपों या फिर तय नियमों के विपरित जाकर कोई फायदा लेना, जैसे कथित तथ्यों के चलते कही है। जयराम का कहना था कि राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बेटे दुष्यंत सिंह को आप सब जानते हैं। ललित मोदी के बारे में भी आपको जानकारी है। कई वर्ष पहले यह भी सार्वजनिक हो चुका है कि ललित मोदी और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री के बीच में क्या रिश्ते थे।
हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के बेटे अनुराग ठाकुर की बातें सबको मालूम हैं। बतौर जयराम रमेश, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के बेटे अभिषेक सिंह का नाम तो पनामा पेपर में प्रकाशित हुआ है। चौथा बेटा तो सबसे बड़ा बेटा है यानी जयशाह। उसके बारे में आप जानते हैं, कंपनी घाटे में चलाता है, पर एक साल में करोड़ों रुपये का मुनाफा कमाता है। इस क्रम में पांचवें नंबर पर शौर्य डोभाल का नाम आता है। इंडिया फाउंडेशन के बारे में सारी जानकारी लोगों के पास है। दूसरे बेटे विवेक दोभाल ने केमैन आइलैंड में फंड खोलकर चमत्कार दिखाया है। कांग्रेस पार्टी ने इस मामले की जांच कराने की मांग की है।
'शहजादे' ने कुछ ऐसा कर दिया है कि यकीन नहीं हो रहा
रमेश ने कहा कि 8 तारीख को नोटबंदी होती है, 13 दिन के बाद केमैन आइलैंड में फंड खोला जाता है, 4 महीने बाद एफडीआई आने लगती है। देखते-देखते 12 महीने में इतनी एफडीआई आ गई, जितनी 17 साल में नहीं मिली थी। इसके पीछे कुछ काला ही है। आरबीआई को जांच करनी चाहिए।
शौर्य डोभाल का एक फंड है– 'जीयूस', ज्यूस स्ट्रेटेजिक मैनेजमेंट एडवाइजर और जी.एन.वाई के बीच क्या रिश्ता है। जी.एन.वाई एशिया का कांड सिर्फ एक बेटे तक सीमित नहीं है, इस जाल में दोनों बेटे फंसे हुए हैं। ये बिल्कुल एक 'डी' कंपनी की तरह है और ये बिल्कुल साफ है। जो पैसा 17 साल में आया, वो 12 महीने में आ जाता है। यह सब नोटबंदी के बाद होता है। जी.एन.वाई. एशिया के दो डायरेक्टर हैं - एक डायरेक्टर तो विवेक डोभाल हैं। उसके बाद दो और डायरेक्टर जोड़े जाते हैं।
उनमें एक डायरेक्टर तो वे हैं, जिसका नाम सभी रिकार्ड में छपा है - डॉन डब्ल्यू ईबैंक्स। जयराम रमेश ने कहा, ये कौन है? इसका नाम पनामा पेपर में मौजूद है, इसका नाम पैराडाईज पेपर में मौजूद है। आप जानते हैं कि छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे का नाम भी था और डॉन डब्ल्यू ईबैंक्स का नाम भी है। ये डॉन डब्ल्यू ईबैंक्स कौन है- जी.एन.वाई.एशिया का एक डायरेक्टर। तो क्या ये स्वाभाविक नहीं है कि अब दोभाल पर सवाल उठेंगे। हमारे पड़ोसी देश में तो एक प्रधानमंत्री को पनामा और पैराडाईज पेपर की वजह से इस्तीफा देना पड़ा था। ये सब बातें लोकसभा चुनाव के दौरान सिलसिलेवार ढंग से जनता के सामने रखी जाएंगी। लोगों को पता चलेगा कि सत्ता पक्ष के शहजादे भी कम नहीं हैं।