अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गड़बड़ी के मामले को लेकर कांग्रेस ने एसआईटी की जांच पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि मामले की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच जरूरी है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग की है। जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट में ‘चंदा चोरी, आस्था धोखा’ शीर्षक के साथ कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एसआईटी की चार्जशीट में सामने आई जानकारी जांच के तरीके को लेकर सवाल खड़े करती है।
105 घटनाओं का किया गया है जिक्र
एसआईटी की जांच से जुड़े विवरण के मुताबिक, राम मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में कथित चोरी की 105 घटनाएं सामने आई हैं। एसआईटी ने मामले में आठ लोगों को आरोपी बनाया है। सितंबर में जांच एजेंसी ने करीब 74 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी।
जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि जब सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूत सामने आ गए थे, तो एफआईआर दर्ज करने में देरी क्यों हुई। उन्होंने यह भी पूछा कि जांच का दायरा केवल आठ आरोपियों तक ही क्यों सीमित रहा।
ट्रस्ट के पदाधिकारियों की भूमिका पर सवाल
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मंदिर की व्यवस्था और चढ़ावे की निगरानी से जुड़े कुछ लोगों को आरोपी बनाने के बजाय गवाह बनाया गया। उन्होंने सवाल किया कि क्या पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी तय किए बिना मामले की जांच पूरी मानी जा सकती है।
हालांकि, ये सवाल कांग्रेस और जयराम रमेश की ओर से उठाए गए हैं। जांच एजेंसी की ओर से जिन लोगों को आरोपी बनाया गया है, उनके खिलाफ अदालत में मामला विचाराधीन है और आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होगा।
आठ आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुई चार्जशीट
एसआईटी ने आठ गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने सात आरोपियों से करीब 79.8 लाख रुपये बरामद किए थे। आरोपियों पर आपराधिक विश्वासघात और भ्रष्टाचार निवारण कानून समेत विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
कांग्रेस ने की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग
जयराम रमेश ने कहा कि यह मामला राम भक्तों की आस्था से जुड़ा है, इसलिए जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए। कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग करते हुए कहा है कि जब तक वास्तविक जिम्मेदारी तय नहीं होती, तब तक मामले को पूरी तरह खत्म नहीं माना जाना चाहिए।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी सवाल उठाया और उनसे इस मामले पर प्रतिक्रिया देने की मांग की। प्रधानमंत्री की ओर से इस आरोप पर प्रतिक्रिया का उल्लेख उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं है।