क्या कांग्रेस दिल्ली की राजनीति में वापसी कर रही है और पिछले चुनावों में दूर हुआ वोटबैंक उसके पास वापस आ रहा है? या फिर कांग्रेस का बढ़ रहा जनाधार मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को डरा रहा है? दिल्ली प्रदेश कांग्रेस की नेता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने इसे लेकर अरविंद केजरीवाल को आड़े हाथों लिया है। केजरीवाल ने शनिवार को आरडब्लूए की एक मीटिंग में कहा था कि अगले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को वोट मत देना, नहीं तो मोदी पीएम के रूप में दोबारा आ जायेगें।
शर्मिष्ठा मुखर्जी में केजरीवाल के इस बयान पर उन्हें आईना दिखाया है। मुखर्जी ने अमर उजाला से कहा कि दरअसल, पीएम मोदी की तरह खुद केजरीवाल की विश्वसनीयता संदेह के घेरे में है। उन्होंने जनता से जो वादा किया, उसमें कुछ भी पूरा नहीं कर पाए। इसलिए उन्हें अपने काम पर जीतकर वापस आने का कोई भरोसा नहीं है। लिहाजा केजरीवाल लोगों को प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर डरा कर उनका वोट हासिल करना चाहते हैं।
बुरी तरह हारी आप पार्टी
शर्मिष्ठा के अनुसार उपचुनावों में आप पार्टी के नेता बुरी तरह पराजित हुए हैं। इसके बाद से ही अरविंद केजरीवाल महागठबंधन में आने और कांग्रेस से जुड़ने के लिए छटपटा रहे थे, लेकिन जब कांग्रेस की तरफ से उन्हें कोई आश्वासन नहीं मिला, तब वे उसकी बुराई करने लगे। सिर्फ दिल्ली ही नहीं राजस्थान, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनावों में भी वे कांग्रेस का वोट बैंक खराब करना चाहते हैं, इसीलिए वहां से चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे इसका सीधा फायदा भाजपा को मिले।
वहीं, केजरीवाल अपनी बात की तस्दीक इस तथ्य के साथ करते हैं कि 2014 में भाजपा को लगभग 46 फीसदी, आप को 33 और कांग्रेस को 15 फीसदी मत मिला था। इस बार भाजपा के वोटों में दस फीसदी की कमी आने का अनुमान है। ऐसे में भाजपा चाहती है कि ये वोट कांग्रेस की ओर चले जाएं जिससे इन वोटों के खिसकने के बाद भी वह सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर जाए।
केजरीवाल और कांग्रेस की इस जंग पर हंसते हुए दिल्ली भाजपा के नेता दिनेश प्रताप सिंह कहते हैं, हारने वालों को अपनी एक और हार का डर अभी से सताने लगा है, इसलिए वे अभी से हार से बचने के बहाने खोजने लगे हैं। उनके पास नरेंद्र मोदी के नाम की विश्वसनीयता है और वे उसी के बल पर दिल्ली की सातों सीटों पर दोबारा फतह हासिल करने में कामयाब रहेंगे।