शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में कांग्रेस के धर्मनिरपेक्ष होने और नाम परिवर्तन का विरोध करने के लिए हमला किया है। दरअसल, शिवसेना और कांग्रेस के बीच औरंगाबाद का नाम बदलकर संभाजीनगर करने के प्रस्ताव पर विवाद चल रहा है। महाराष्ट्र में एक साथ सरकार चला रही शिवसेना ने सहयोगी कांग्रेस पार्टी पर तंज कसा है। शिवसेना ने सामना के एक संपादकीय के जरिये कहा है कि औरंगाबाद का नाम बदलने से धर्मनिरपेक्ष दलों के वोट बैंक पर असर पड़ सकता है, क्योंकि नाम बदलने से मुस्लिम समाज नाराज हो जाएगा।
संपादकीय में रखी अपनी बात
संपादकीय में लिखा गया है, "भारत का संविधान धर्मनिरपेक्ष था। औरंगजेब को अन्य धर्मों से सख्त नफरत थी। उसने सिखों और हिंदुओं पर अत्याचार किया। हमें उनके अवशेषों पर ध्यान क्यों देना चाहिए? औरंगजेब कौन था? कम से कम महाराष्ट्र को यह समझाने की जरूरत नहीं है। इसलिए एक सच्चे मराठी और कट्टर हिंदू व्यक्ति को औरंगजेब से लगाव होने का कोई कारण नहीं है।''
कांग्रेस को आड़े हाथों लिया
सामना में आगे लिखा है, “औरंगाबाद का नाम बदलकर संभाजीनगर करने को लेकर एक राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। कांग्रेस जैसी सेक्युलर पार्टियां औरंगाबाद को संभाजीनगर का नाम देने के पक्ष में नहीं हैं। औरंगाबाद का नाम बदलने से मुस्लिम समाज नाराज हो जाएगा यानी अल्पसंख्यकों का उनका वोट बैंक प्रभावित होगा। इसका अर्थ यह है कि उनकी धर्मनिरपेक्ष छवि पर सवाल उठाया जाएगा।"
महाराष्ट्र में एक बड़ा वर्ग नाम बदलने के पक्ष में
संपादकीय में आगे लिखा है कि महाराष्ट्र में ऐसे लोगों का एक बड़ा वर्ग है जो नाम बदलने के पक्ष में हैं। आगे लिखा है, "क्या औरंगाबाद का नामकरण लोगों के विकास की समस्या को हल करता है? नाम बदलने का विरोध करने वाले इस तरह के मुद्दे को उठा रहे हैं। हालांकि, कम से कम महाराष्ट्र में औरंगजेब का कोई निशान नहीं रखा जाना चाहिए। लोगों का एक बड़ा वर्ग है, जो इसके पक्ष में हैं। औरंगजेब के आदेश पर महाराष्ट्र के राजा संभाजी को मुगल सरदारों द्वारा प्रताड़ित और मार डाला गया और उनके शव को पुणे के पास सड़क पर फेंक दिया गया।"
बालासाहेब के सपने को पूरा करेंगे
शिवसेना ने महाराष्ट्र के नेताओं से औरंगजेब के इतिहास को फिर से पढ़ने के लिए कहा है। वहीं एक कार्यक्रम के दौरान आदित्य ठाकरे ने कहा, "हिंदू हृदय सम्राट शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे का संभाजीनगर सबसे पसंदीदा शहर रहा है, इसलिए राज्य की महाविकास आघाड़ी सरकार संभाजीनगर पर एकमत से निर्णय लेगी। शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे ने जो सपना महाराष्ट्र को लेकर देखा है, वह हम पूरा करेंगे।"