चुनाव में वरिष्ठ नेता खरगे का पलड़ा भारी माना जा रहा है। उन्हें गांधी परिवार की पसंद कहा जा रहा है। साथ ही पार्टी वरिष्ठ नेताओं का भी उन्हें समर्थन हासिल है। वहीं दूसरी ओर थरूर खुद को पार्टी में बदलाव का उम्मीदवार बताकर समर्थन जुटाते रहे हैं। चुनाव प्रचार के दौरान थरूर ने दोनों उम्मीदवारों को लेकर भेदभाव का भी आरोप लगाया था।
137 साल में छठवीं बार चुनाव : 137 साल पुरानी कांग्रेस पार्टी में छठवीं बार अध्यक्ष पद के लिए चुनाव कराया जा रहा है। इस चुनाव में गांधी परिवार का कोई भी सदस्य हिस्सा नहीं ले रहा है। पार्टी अध्यक्ष के लिए आखिरी बार चुनाव 2000 में हुआ था। उस वक्त सोनिया गांधी ने यूपी से नेता जितेंद्र प्रसाद को हराया था।
कांग्रेस अध्यक्ष पद चुनाव में प्रदेश कांग्रेस समितियों के निर्वाचित मंडल के सदस्यों को अब पसंद के उम्मीदवार के नाम के आगे ‘1’ की जगह सही का निशान मान्य होगा। इसके पहले मतपत्र पर पसंद के उम्मीदवार के नाम के आगे ‘1’ लिखने के निर्देश दिए गए थे। इससे शशि थरूर के लिए मुश्किल स्थिति बन गई थी।
समस्या के समाधान के लिए उनकी टीम ने पार्टी के केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण अध्यक्ष के साथ यह मुद्दा उठाया था। दरअसल, मतपत्र में मल्लिकार्जुन खरगे का नाम क्रमांक ‘1’ पर और थरूर का नंबर ‘2’ पर है। इससे मतदाताओं को भ्रमित होने की आशंका थी।
गांधी परिवार की सलाह लेने में शर्म नहीं : खरगे
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने रविवार को कहा कि गांधी परिवार ने पार्टी को मजबूत करने के लिए संघर्ष किया है। पार्टी अध्यक्ष चुने जाने पर उन्हें गांधी परिवार की सलाह और समर्थन लेने में कोई शर्म नहीं होगी। अध्यक्ष बनने के बाद गांधी परिवार द्वारा रिमोट से नियंत्रण के सवाल पर खरगे ने कहा, ऐसी बातें वे कहते हैं जिनके पास कहने के लिए कुछ नहीं है। भाजपा इस तरह के अभियान में शामिल है। उन्होंने कहा, सोनिया गांधी ने 20 साल तक संगठन में काम किया है। एजेंसी