यूपी के चुनावी शंखनाद की काशी से शुरुआत करने आईं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की सेहत को लेकर हद दर्जे की लापरवाही बरती गई। वीवीआईपी दौरे को लेकर प्रशासन की संजीदगी का अंदाजा इंतजामों की हकीकत से लगाया जा सकता है।
सर्किट हाउस में जहां वह ठहरी थीं, वहां सेफ रूम तक नहीं बनाया गया था। कहा जा रहा है कि बाबतपुर हवाई अड्डे से इंग्लिशिया लाइन तक करीब 40 किमी लंबे रोड शो के लिए वह मेडिकली अनफिट थीं।
बावजूद इसके उन्हें गड्ढों में तब्दील हो चुकी सड़कों, धूल भरे रास्तों और स्लाटर हाउस की दुर्गंध वाले इलाकों से ले जाया गया। सोनिया की सेहत के प्रति पार्टी के रणनीतिकारों का रवैया गैरजिम्मेदाराना रहा है।
अहम सवाल यह कि जब सोनिया की तबीयत नासाज थी तो उन्हें रोड शो के लिए रोका क्यों नहीं गया? ये भी मान लें कि उन्होंने जिद की तो रोड शो की शुरुआत निर्धारित स्थल से ही कराई जानी चाहिए थी।
रोड शो सर्किट हाउस से शुरू होना था लेकिन कार्यकर्ताओं के उत्साह को देखते हुए सोनिया खुद को रोक नहीं सकीं और बाबतपुर एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही जनता से रूबरू होने लगीं।
यही वजह थी कि उन्हें लहुराबीर में पहुंचना था ढाई बजे लेकिन वह वहां 5:20 बजे आ पाईं। रोड शो के लिए जिस मार्ग का चयन किया गया था, वह भी उनके स्वास्थ्य के लिहाज से ठीक नहीं था।
यह रूट शहर के सर्वाधिक गड्ढों से भरे रूट के रूप में जाना जाता है। जगह-जगह सड़क टूटी होने के चलते धूल भी बहुत है। कई जगह कूड़ा डंपिंग की जाती है और सबसे अहम यह कि इसी रूट पर स्लाटर हाउस भी है।
रोड शो में साथ चल रहे कई कांग्रेसियों का कहना है कि स्लाटर हाउस के बाद से ही उनकी तबीयत बिगड़नी शुरू हुई। जैसा कि उनकी जांच करने वाले डॉक्टरों ने बताया था कि उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही थी।
इससे लगता है कांग्रेस अध्यक्ष की तबीयत बिगाड़ने में धूल और बदबू भी अहम कारण हो सकते हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रशासन को चाहिए था कि रूट के गड्ढों को भरवाता और साफ-सफाई कराता।