बता दें कि 6 जून को मंदसौर गोलीकांड की पहली बरसी है। कांग्रेस ने इस मौके पर राहुल गांधी की सभा आयोजित की है। राहुल ने पिछले साल गोलीकांड के बाद भी मंदसौर पहुंचने की कोशिश की थी, पर कामयाब नहीं हो सके थे। लेकिन इस बार पार्टी ने बड़ा शो करने की तैयारी की है। उसे लग रहा है कि सूबे की सत्ता हासिल करने का रास्ता मंदसौर से होकर जाता है और किसानों का गुस्सा उसकी मुराद पूरी करने में अहम भूमिका निभा सकता है। लेकिन सत्तारूढ़ भाजपा नहीं चाहती कि कांग्रेस को किसानों की कथित नाराजगी का चुनावी लाभ हो।
इसलिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दो दिन पहले ही मंदसौर पहुंचकर किसानों से कहा, कांग्रेस खूनखराबा फैलाना चाहती है। मध्य प्रदेश शांति का टापू है, इसे बचा लो। कांग्रेस के इरादे को पहचानो। बहकावे में मत आओ। शिवराज का साथ दो। कहा कि मैंने किसानों की योजनाओं पर अब तक 20 हजार करोड़ रुपये खर्च किए हैं। आगे नुकसान हो तो चिंता न करना, मामा अभी जिंदा है।
पिछले साल मंदसौर गोलीकांड में छह किसानों की जान गई थी। सरकार ने इसकी जांच के लिए आयोग बैठाया, पर तीन बार कार्यकाल बढ़ाने के बावजूद अब तक रिपोर्ट का इंतजार है। 11 मई को कार्यकाल की अवधि बीत चुकी है। किसानों में इस बात का भी गुस्सा है कि एक साल होने को आया पर अब तक किसी की जिम्मेदारी तय नहीं हुई है। जाहिर है, कांग्रेस इसे भी मुद्दा बना रही है।
कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ कहते हैं कि भाजपा सरकार किसानों के साथ दुश्मनों जैसा बर्ताव कर रही है। वे अपना हक मांगते हैं तो उन्हें गोली दी जाती है। बुजुर्ग और भोले भाले किसानों का बांड भरवाकर सरकार खुद किसानों को भड़का रही है। अगर आंदोलन के दौरान कोई अप्रिय स्थिति बनती है तो इसके लिए शिवराज जिम्मेदार होंगे।