कांग्रेस पार्टी ने लोकतांत्रिक तरीके से अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव संपन्न करा लिया है। करीब ढाई दशक बाद गैर गांधी मल्लिकार्जुन खरगे ने पार्टी की कमान संभाली है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि 'खरगे' का '80' पर होना, गांधी परिवार को सूट करता है। अस्सी वर्षीय खरगे, पार्टी के लिए कितनी भागदौड़ कर पाएंगे, ये तो समय ही बताएगा। इस चुनाव ने साबित कर दिया है कि कांग्रेस पार्टी में अभी 'रिमोट कंट्रोल' सिस्टम खत्म नहीं होगा। यही वजह रही है कि कांग्रेस को कम आयु वाले शशि थरूर रास नहीं आए।
खास बात है कि खरगे द्वारा अध्यक्ष पद का नामांकन करने के बाद से ही उनकी जीत सुनिश्चित मानी जा रही थी। हालांकि राहुल गांधी ने 'भारत जोड़ो यात्रा' के दौरान कर्नाटक में ऐसे ही एक सवाल पर कहा था कि इस तरह के बयान कांग्रेस पार्टी के आलोचकों की तरफ से दिए जाते हैं। जयराम रमेश ने कहा, पार्टी ने अपने अध्यक्ष का स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराया है। स्वतंत्र चुनाव प्राधिकरण वाली एकमात्र पार्टी कांग्रेस हैं।
राजनीतिक विश्लेषक प्रो. आनंद कुमार कहते हैं, कांग्रेस पार्टी का आज जो हाल हुआ है, उसके पीछे यही दो शब्द जिम्मेदार रहे हैं। कांग्रेस पार्टी, आगे भी इन शब्दों को साथ लेकर चलती है, तो खरगे का चुनाव बेमानी साबित हो जाएगा। दोनों की आयु में बहुत ज्यादा फर्क है। शशि थरूर 66 साल के हैं, जबकि खरगे 80 के पार हैं। लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त होने के बाद कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में भी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। अब यह पार्टी राजस्थान और छत्तीसगढ़ तक सिमट गई है। शशि थरूर के पास भले ही कम आयु और ज्यादा शिक्षा रही हो, लेकिन वे आंख बंद कर कांग्रेस हाईकमान की हां में हां मिलाने को तैयार नहीं थे।
जिस तरह से राहुल गांधी, भारत जोड़ो यात्रा में पसीना बहा रहे हैं, क्या वैसे ही खरगे पार्टी को मजबूती प्रदान कर सकेंगे। किसी भी व्यक्ति के लिए आयु का महत्व होता है। बड़ी आयु में रैलियां करना या लगातार पार्टी की बैठकें करना, संभव नहीं हो पाता। ऐसे में दोबारा से वही शब्द आगे आ जाते हैं यानी रिमोट 'कंट्रोल और हाईकमान'। प्रो. आनंद का कहना है कि कांग्रेस पार्टी को यही गलती दोहराने से बचना है। विपक्ष ने परिवारवाद, रिमोट कंट्रोल और हाईकमान, इन्हीं मुद्दों पर कांग्रेस को निशाना बनाया था। ऐसे में अब कांग्रेस पार्टी को इन मुद्दों से दूरी बनानी होगी। बढ़ती आयु का राष्ट्रीय अध्यक्ष, गांधी परिवार को सूट करता है। हालांकि गांधी परिवार को अब यह मिथक तोड़ना होगा। ध्यान रहे कि पार्टी में अभी असंतुष्ट नेता खत्म नहीं हुए हैं।