पार्टी नेताओं का मानना है कि कांग्रेस एक बार फिर 1967 जैसी परिस्थितियों का सामना कर रही है। तब कामराज के नेतृत्व में बुजुर्ग नेताओं ने इंदिरा गांधी को पार्टी से निकाल दिया था और इंदिरा ने अलग पार्टी बना ली थी। हालांकि वह ज्यादा सफल नहीं हो पाईं और 1971 के पाकिस्तान युद्ध में जीत के बाद इंदिरा कांग्रेस ने धमाकेदार जीत दर्ज की थी।
कलह और बिखराव की वजह से जनता दल 20 साल में छह बार टूटी। इससे टूटकर जनता दल यूनाइटेड, लोक जनशक्ति पार्टी, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय लोक दल, राष्ट्रीय जनता दल, बीजू जनता दल, इंडियन नेशनल लोकदल, जनता दल सेक्युलर, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी, एसजेडी, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा, जेएपी, पीएसपी, जननायक जनता पार्टी, एलजेडी और समाजवादी जनता पार्टी बनीं।
वहीं भाजपा से टूटकर बनीं 17 पार्टियां अपना अस्तित्व नहीं बचा सकीं। भाजपा छोड़ने के कुछ सालों बाद बाद उमा भारती, कल्याण सिंह, केशुभाई पटेल वापस लौट आए। कल्याण सिंह ने जनक्रांति पार्टी, उमा भारती ने जनशक्ति पार्टी, केशुभाई पटेल ने गुजरात परिवर्तन पार्टी, बाबूलाल मरांडी ने झारखंड विकास मोर्चा बनाई थी। हालांकि बिना कमल के साथ के इन्हें राजनीतिक मैदान में सफलता नहीं मिल पाई।