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उदयपुर में सत्ता की चाबी!: बुरे दौर से गुजर रही कांग्रेस के लिए इसलिए अहम है यह बड़ी बैठक, चिंतन शिविर से पहले रोड मैप तैयार

आशीष तिवारी
Updated Mon, 09 May 2022 06:04 PM IST

सार

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बताते हैं कि चिंतन शिविर से जो बड़ा फैसला या बड़ी नीति जनता के लिए निकल कर आती है और फिर उसे हकीकत में जमीन पर लागू किया जाता है, तो निश्चित तौर पर कांग्रेस के लिए वह ऑक्सिजन की तरह ही होगी। क्योंकि कांग्रेस इस वक्त अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है...
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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में सीडब्ल्यूसी की बैठक - फोटो : Agency

 

वह कहते हैं जब लोगों को यह भरोसा हो जाएगा कि कांग्रेस की सरकार ही ऐसी ही विषम परिस्थितियों में आपके लिए मजबूती से खड़ी रह सकती है, तो ऐसे शिविरों में तैयार की गई योजनाएं न सिर्फ पार्टी को मजबूत करेंगीं, बल्कि दोबारा से सत्ता में आकर अपने किए गए वादों को पूरा भी कर सकेंगे। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि कोविड के सबसे बुरे दौर के बाद देश में जिस तरीके की अर्थव्यवस्थाएं और मैनेजमेंट होना चाहिए लेकिन वह नहीं हो पा रहा है। उस पर भी चिंतन किया जाएगा। इसके अलावा पुराने चिंतन शिविरों की तरह उदयपुर चिंतन शिविर में भी निश्चित तौर पर कुछ ऐसा मसौदा निकल कर सामने आ सकता है, जो कांग्रेस के लिए ऑक्सिजन की तरह हो। लेकिन उससे पहले पार्टी को अपने कार्यकर्ताओं में भरोसा जगाने वाली नीतियों को सामने भी रखना होगा। इसके अलावा जो राजनीतिक गठबंधन या सरकार बनाने के लिए नीतिगत फैसले लेने होंगे, उन्हें भी चिंतन शिविर के माध्यम से पूरी रूपरेखा बनाकर लागू किया जाएगा।

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