वह कहते हैं जब लोगों को यह भरोसा हो जाएगा कि कांग्रेस की सरकार ही ऐसी ही विषम परिस्थितियों में आपके लिए मजबूती से खड़ी रह सकती है, तो ऐसे शिविरों में तैयार की गई योजनाएं न सिर्फ पार्टी को मजबूत करेंगीं, बल्कि दोबारा से सत्ता में आकर अपने किए गए वादों को पूरा भी कर सकेंगे। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि कोविड के सबसे बुरे दौर के बाद देश में जिस तरीके की अर्थव्यवस्थाएं और मैनेजमेंट होना चाहिए लेकिन वह नहीं हो पा रहा है। उस पर भी चिंतन किया जाएगा। इसके अलावा पुराने चिंतन शिविरों की तरह उदयपुर चिंतन शिविर में भी निश्चित तौर पर कुछ ऐसा मसौदा निकल कर सामने आ सकता है, जो कांग्रेस के लिए ऑक्सिजन की तरह हो। लेकिन उससे पहले पार्टी को अपने कार्यकर्ताओं में भरोसा जगाने वाली नीतियों को सामने भी रखना होगा। इसके अलावा जो राजनीतिक गठबंधन या सरकार बनाने के लिए नीतिगत फैसले लेने होंगे, उन्हें भी चिंतन शिविर के माध्यम से पूरी रूपरेखा बनाकर लागू किया जाएगा।