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अपशब्दों पर सियासत: पीएम मोदी की अपील के बाद चिदंबरम ने साधा निशाना, पूछा- क्या BJP के ट्रोल्स को भी माफ किया?

Sat, 01 Aug 2026 10:57 AM IST
Devesh Tripathi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जंतर-मंतर प्रदर्शन में आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने वाले युवाओं को माफ करने की अपील के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने सवाल उठाया कि क्या सरकार की आलोचना करने वालों के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाले भाजपा समर्थक सोशल मीडिया खातों के लिए भी यही दृष्टिकोण अपनाया जाएगा।
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पीएम मोदी से चिदंबरम ने पूछा सवाल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। चिदंबरम ने पीएम मोदी से सवाल किया कि क्या उन्होंने सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना करने वालों के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणियां करने वाले भाजपा के "ट्रोल्स" को भी माफ किया है।
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चिदंबरम ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, "क्या माननीय प्रधानमंत्री ने एक्स पर सरकार की आलोचना करने वाली पोस्ट पर अभद्र और अश्लील टिप्पणियां करने वाले भाजपा ट्रोल्स को भी माफ कर दिया है?" कांग्रेस सांसद की यह टिप्पणी सार्वजनिक विमर्श की भाषा और सोशल मीडिया पर अपशब्दों के इस्तेमाल को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच आई है।

पीएम मोदी ने युवाओं को माफ करने की अपील में क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में कहा था कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कुछ युवाओं ने बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि उन्हें और उनकी दिवंगत मां को भी अपमानजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ा।
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प्रधानमंत्री ने कहा, "जंतर-मंतर पर जो हुआ, उसे देश और दुनिया ने देखा। कुछ शरारती बच्चों ने बेहद भद्दी और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, जो किसी भी सभ्य समाज के अनुरूप नहीं है। मुझे व्यक्तिगत रूप से गालियां दी गईं और मेरी दिवंगत मां के बारे में भी अपमानजनक बातें कही गईं। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था।"

समाज से पीएम मोदी ने की क्या अपील?
प्रधानमंत्री ने कहा, "बचपन और युवावस्था में गलतियां हो जाती हैं और यही वह समय होता है, जब उनसे सीखने का अवसर भी मिलता है। समाज में इस तरह की भाषा को लेकर जो आक्रोश है, उसे वह पूरी तरह समझते हैं। हमारी बेटियों के मुंह से इस तरह की भाषा सुनना सांस्कृतिक रूप से भी झकझोरने वाला है। लेकिन अब समय उन्हें अपनाने और सही दिशा दिखाने का है।" उन्होंने कहा कि युवाओं को सजा देना, उन्हें अदालतों के चक्कर लगवाना या समाज में उन्हें परेशान करना समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि युवाओं को उनकी गलती का एहसास कराकर सही रास्ता दिखाना समाज की जिम्मेदारी है।

प्रधानमंत्री ने कहा, "मैं उन्हें माफ करना चाहता हूं। समाज को भी मेरी इस भावना को स्वीकार करना चाहिए। कई बार हमारी जीभ दांतों के बीच आ जाती है और उससे खून भी निकल आता है, लेकिन हम अपने दांत नहीं तोड़ते। क्योंकि दांत भी हमारे हैं और जीभ भी हमारी है। उसी तरह ये बच्चे भी हमारे हैं। इन्हें सही रास्ता दिखाना हमारा कर्तव्य है।" उन्होंने यह भी कहा कि भटके हुए लोगों को सही मार्ग दिखाना कठिन जरूर है, लेकिन यह जिम्मेदारी समाज को निभानी ही होगी।

जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद दर्ज हुई थी एफआईआर
प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी उस मामले के बाद आई थी, जिसमें नोएडा पुलिस ने नीट पेपर लीक को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा आयोजित प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियां करने के आरोप में एक युवती के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।

इस बीच, नीट पेपर लीक विरोध प्रदर्शनों के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। वहीं, संसद ने गुरुवार को पेपर लीक रोकने के लिए कानूनी ढांचे को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पारित कर दिया।
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