बूढ़े कांग्रेसी नेताओं को सांगठनिक कामकाज से थोड़ा आराम
पूर्व रक्षा मंत्री 79 साल के एके एंटनी, 71 साल के अहमद पटेल, 60 के मुकुल वासनिक, 57 के केसी वेणुगोपाल और 52 साल के युवा रणदीप सुरजेवाला को नई और ताकतवर कमान मिली है। ये कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को उनके कामकाज में सहयोग देंगे। कुल मिलाकर पार्टी ने बूढ़े कांग्रेसी नेताओं को सांगठनिक कामकाज से थोड़ा आराम देकर कुछ उनसे उम्र में कुछ कम वफादारों को जगह दे दी है। इसमें राहुल गांधी के प्रिय रणदीप सुरजेवाला को उनकी मेहनत, वाकपटुता और कौशल का ईनाम दिया है, तो केसी वेणुगोपाल की प्रबंधन कला को खास जगह मिली है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सलाहकारों की टीम में मुकुल वासनिक, अंबिका सोनी कद बना हुआ है।
राज्यसभा वाले नेता
पार्टी ने जिन नेताओं को महासचिव पद की जिम्मेदारी से मुक्त किया है, उनमें सभी राज्यसभा वाले नेता हैं। मल्लिकार्जुन खड़गे भी 2019 में अपना लोकसभा चुनाव हार गए थे। बेहद बुजुर्ग मोती लाल वोरा काफी समय से राज्यसभा के रास्ते से संसद में आ रहे हैं। गुलाम नबी आजाद, लुइजिनियो फलेरियो, अंबिका सोनी, मुकुल वासनिक भी इसी श्रेणी के नेता हैं। जिन नेताओं की जिम्मेदारी बढ़ाई गई है, उनमें भी सभी राज्यसभा वाले हैं। रणदीप सुरजेवाला फिलहाल राज्य और केंद्र सरकार के किसी भी सदन के सदस्य नहीं है। दिलचस्प है कि जिन नेताओं के पर कतरे गए हैं न तो उनमें कोई जनाधार वाला नेता है और जिन नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है, उनमें भी कोई जनाधार वाला नेता नहीं है। पार्टी के एक पूर्व सचिव का कहना है कि जब राज्यसभा वाले नेताओं के भरोसे ही कांग्रेस को चलना है तो क्या अच्छा और क्या बुरा। जो हो जाए सब ठीक है।
क्यों किया गया बदलाव?
कभी पार्टी के रणनीतिकारों में रहे और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी तक सीधी पकड़ रखने वाले सूत्र के अनुसार पार्टी में एक बड़ा बदलाव जरूर है। सूत्र का कहना है कि 2019 के लोकसभा चुनाव और राहुल गांधी के इस्तीफा देने के बाद पार्टी बेपटरी हो गई थी। कांग्रेस ने सोनिया गांधी को पार्टी का अंतरिम अध्यक्ष चुन तो लिया था, लेकिन सोनिया के खराब स्वास्थ्य के कारण दिशाहीनता बढ़ती जा रही थी। 72 साल के पुराने कांग्रेसी नेता का कहना है कि सच में दो चीजें बहुत खराब हुईं। पहला राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद उनकी टीम के युवा नेता जरूरत से ज्यादा उत्साहित हो गए। इससे वरिष्ठ नेता जरूरत से ज्यादा हतोत्साहित होकर शांत हो गए। लेकिन जब सोनिया गांधी ने कार्यभार संभाला तो पुराने नेता पुराने फार्म में आ गए और तमाम युवा नेताओं को लगा वे बलहीन हो गए हैं। उन्होंने कहा कि मैं भी इसका भुक्तभोगी हूं, लेकिन यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि पिछले एक साल में बहुत कुछ अच्छा नहीं हुआ। अंदरूनी कारणों से कांग्रेस को मध्य प्रदेश की सरकार गंवानी पड़ी, राजस्थान की सरकार पर संकट के बादल मंडराए। इसलिए कुछ ऐसा तो होना ही था। ताकि युवा और वरिष्ठ नेताओं के बीच में तालमेल के साथ काम करने का संदेश दिया जा सके।
23 के लेटर बम से मत जोड़िए
गुड़गांव में रहने वाले नेहरू-गांधी परिवार के एक वफादार की सुनिए। वह कहते हैं कि इसे कांग्रेस पार्टी के 23 नेताओं द्वारा पत्र लिखने से मत जोडि़ए। सूत्र का कहना है कि उन्होंने पत्र लिखकर कुछ गलत नहीं किया। यह लोकतांत्रिक पार्टी है। लेकिन सार्वजनिक रुप से बयान देकर और पत्र को लिखकर जरूर मर्यादा लांघी। इसमें गुलाम नबी आजाद जैसे नेता भी शामिल हो गए। सूत्र का कहना है कि इसे मैं गलत मानता हूं। लेकिन जो बात इन नेताओं ने उठाई, वह पार्टी के भीतर उठनी चाहिए थी। पार्टी को भी अपने युवा और बूढ़े हो रहे नेताओं का लगातार मूल्यांकन करना चाहिए। कांग्रेस ने यही किया है। 23 नेताओं में से कई नेता अभी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाएंगे। उन्हें जिम्मेदारी दी भी गई है। बदलाव में यही तो होता है। कर्नाटक में अब राज्य की राजनीति में सक्रिय एक नेता का कहना है कि जनार्दन द्विवेदी और मोहन प्रकाश जैसे नेता 24 अकबर रोड से इतने दूर क्यों बैठने पर मजबूर हुए। जब इन्हें संगठन से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है, बीके हरिप्रसाद को कर्नाटक भेजा जा सकता है तो फिर इस बदलाव में इतना शोर क्यों मच रहा है?
कांग्रेस अध्यक्ष ने संतुलन बनाया है
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक संतुलन बनाया है। कांग्रेस कार्यसमिति, पार्टी संगठन के पद, राज्यों के प्रभारी की जिम्मेदारी को लेकर उन्होंने एक सकारात्मक सोच से प्रयास किया है। कुछ वरिष्ठ नेताओं को महासचिव के पद से मुक्त किया है, तो कुछ नए लोगों को जगह दी है। अधिक से अधिक युवा नेताओं को राज्यों के प्रभार सौंपे हैं। ताकि सांगठनिक कामकाज को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाया जा सके। सूत्र का कहना है कि 65-70 साल से अधिक उताओं को वैसे भी राज्यों के प्रभार जैसी जिम्मेदारी से मुक्त कर देना बेहतर है। उनके अनुभव का लाभ लेने के लिए पार्टी को उन्हें सलाहकार की टीम ही रखना चाहिए।