कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने गुरुवार को कांग्रेस नेता सोनिया गांधी को पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के 51 बक्सा में बंद कागजात लौटाने पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। दरअसल, केंद्र सरकार ने सोनिया गांधी को नेहरू के कागजात के 51 कार्टन लौटाने को कहा था।
मोदी की नीति नेहरू के इर्द- गिर्द घूमती है- भगत
इस पर सांसद भगत ने कहा, "2014 में प्रधानमंत्री मोदी के सत्ता में आने के बाद से, वह जो कुछ भी करते हैं और जो भी नीति लागू करते हैं, वह नेहरू के इर्द-गिर्द घूमती है। स्थिति यह है कि वह सच्चाई के साथ नहीं चलते, इसीलिए ऐसी घटनाएं होती हैं। हमारी राष्ट्रीय विरासत राष्ट्र के साथ ही रहेगी।"
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संस्कृति मंत्रालय ने एक्स पर एक पोस्ट में स्पष्ट किया कि इन दस्तावेजों को लापता नहीं कहा जा सकता, क्योंकि इनका पता चल चुका है और इन्हें वापस लाने के लिए प्रयास जारी हैं, साथ ही यह भी कहा कि ये राष्ट्र की दस्तावेजी विरासत का हिस्सा हैं। यह किसी की निजी संपत्ति नहीं है।
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संस्कृति मंत्रालय ने बुधवार को स्पष्ट किया कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के निजी दस्तावेजों को प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय (पीएमएमएल) से लापता नहीं कहा जा सकता, क्योंकि वह कहां हैं। वह सारे दस्तावेज पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के पास हैं। संस्कृति मंत्रालय ने कहा, "श्रीमती सोनिया गांधी के प्रतिनिधि एम.वी. राजन ने 29 अप्रैल, 2008 के पत्र के माध्यम से अनुरोध किया था कि श्रीमती गांधी पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के सभी निजी पारिवारिक पत्रों और नोट्स को वापस लेना चाहती हैं। नेहरू पेपर्स के 51 बक्सा 2008 में श्रीमती सोनिया गांधी को भेजे गए थे। पीएमएमएल तब से इन दस्तावेजों की वापसी के लिए सोनिया गांधी के कार्यालय के साथ लगातार पत्र लिख रहा है।