लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला गुरुवार को भी दिनभर अपने चैंबर में रहे और सदन में आसन पर नहीं बैठे। दोपहर बाद तीन बजे सदन की बैठक बुलाई गई, तो सभापति के आसन पर आसीन मीनाक्षी लेखी ने गौरव गोगोई समेत कांग्रेस पार्टी के सातों सांसदों को बजट सत्र के शेष बचे दिनों (तीन अप्रैल तक) के लिए निलंबित कर दिया।
कांग्रेस के लोकसभा में नेता अधीर रंजन चौधरी ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र की मर्यादा के खिलाफ बताया है। उन्होंने कहा आखिर यह कैसी तानाशाही है? कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि आखिर यह कहां का न्याय है। वहीं भाजपा के सांसदों और केंद्र सरकार के मंत्रियों ने कांग्रेस सांसदों के आचरण को लोकतंत्र की मर्यादा के विरुद्ध बताया।
क्या कहते हैं गौरव गोगोई?
गौरव गोगोई का कहना है कि दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा हुई है। दर्जनों लोग मारे गए, सैकड़ों घायल हुए, लोगों के मकान, दुकान जल गए। दिल्ली के लोग दर्द में हैं। वह और कांग्रेस के सांसद इस मुद्दे को लोकसभा में उठाकर उस पर चर्चा की मांग कर रहे हैं।
गोगोई का कहना है कि दिल्ली में इस तरह के हालात से वह दु:खी हैं और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी के सांसदों, नेताओं ने बुधवार को दिल्ली में जाकर लोगों का दु:ख दर्द जाना है। गुरुवार को भी कांग्रेस और विपक्ष के सांसद इस मुद्दे पर लोकसभा में चर्चा चाह रहे थे।
वह इस मुद्दे को उठाकर चर्चा की मांग कर रहे थे। गोगोई सवाल उठाते हैं कि इसमें गलत क्या है? आखिर सरकार चर्चा से क्यों भाग रही है?
गोली मारो...वाले खा रहे मलाई
गौरव गगोई ने कहा कि यह कौन सा न्याय है? गोली मारो का नारा लगवाने वाले, दिल्ली में भड़काऊ भाषण देने वाले मलाई खा रहे हैं। अनुराग ठाकुर, प्रवेश वर्मा जैसे नेताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। भाजपा नेता दिल्ली हिंसा के बाद भी पश्चिम बंगाल में जाकर गोली मारो का नारा लगवा रहे हैं और सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है।
प्रधानमंत्री, गृहमंत्री मौन हैं। इतना ही नहीं भाजपा प्रवक्ता, सांसद और नेता टीवी चैनल, मीडिया में हर रोज दिल्ली हिंसा पर बोल रहे हैं, लेकिन सरकार लोकसभा में चर्चा से भाग रही है।
गौरव गोगोई ने कहा कि आखिर यह कौन सा न्याय है कि भाजपा के भड़काऊ भाषण देने वाले नेताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है और कांग्रेस के सांसदों को दिल्ली में हिंसा पर चर्चा की मांग करने पर सदन से निलंबित किया जा रहा है।
अशोभनीय और निंदनीय है विपक्ष का आचरणः भाजपा
संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने विपक्षी सांसदों के आचरण की निंदा की। उन्होंने कहा कि विपक्ष के सांसद अहंकार और अनुशासनहीनता की सीमा पार कर रहे हैं। वह लोकसभा अध्यक्ष पर कागज फाड़कर फेंक रहे हैं। जोशी ने कहा कि ऐसा करना अशोभनीय और निंदनीय है।
केंद्रीय गृहराज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि संसद में कांग्रेस के सांसदों का आचरण अमर्यादित हैं। वह लोकसभा अध्यक्ष के आसन का सम्मान नहीं कर रहे हैं। रेड्डी ने कहा कि लोकसभा में विरोध करना, अपनी मांग रखना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन कांग्रेस के सांसद जिस तरह से स्पीकर के ऊपर कागज फाड़कर फेक रहे हैं, यह ठीक नहीं है।
भाजपा सांसद रमेश विधूड़ी ने कहा कि रमा देवी पीठासीन सभापति के आसन पर थीं। वह व्यवस्था दे रही थीं और कांग्रेस के सांसद गौरव गोगोई ने क्या किया? क्या यह संसदीय मर्यादा के अनुरूप है?
विधूड़ी ने कहा कि इस तरह की घटना कोई पहली बार नहीं हुई है। विपक्षी के सांसद पिछले कुछ दिन से लगातार ऐसा कर रहे हैं। इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
निलंबन का निर्णय लोकसभा अध्यक्ष ने नहीं सुनाया
लोकतंत्र, व्यवस्था और राजनीति तीनों में गजब की केमिस्ट्री है। गुरुवार पांच मार्च को यह संसद में फिर देखने को मिली। दो दिन पहले लोकसभा अध्यक्ष ने विपक्ष के सांसदों को वेल में सत्ता पक्ष की तरफ जाने या प्ले कार्ड लेकर आने पर निलंबन की खुली चेतावनी दी थी। बुधवार को वह दिनभर चैंबर में रहे, सदन में आसन पर नहीं आए।
प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री भी सदन में नहीं आए। लोकसभा में विपक्षी सांसदों के निलंबन के समय दोनों शीर्ष नेता संसद भवन के अपने कक्ष में थे। गुरुवार को भी लोकसभा अध्यक्ष सदन में अपने आसन पर नहीं आए और यह फैसला मीनाक्षी लेखी ने सुनाया। इसकी एक वजह यह भी है कि अभी तक लोकसभा में उपाध्यक्ष का चयन नहीं हो सका है।
लोकसभा अध्यक्ष ने क्यों बनाई दूरी
सत्ता पक्ष के सांसद इस सवाल पर मौन साध लेते हैं। विपक्ष के सांसद मुस्कराकर जवाब टाल जाते हैं। सत्ता पक्ष के दिल्ली से एक सांसद का कहना है कि यह लोकतंत्र है। सत्ता पक्ष, विपक्ष की राजनीति चलती रहती है। लोकसभा अध्यक्ष को अभी अगले चार साल और सदन चलाना है।
इसलिए वह भला इस तरह की घोषणा करके विपक्ष के सांसदों से दुश्मनी क्यों मोल लें? क्या पता विपक्ष के नेता लोकसभा अध्यक्ष से मिल लें और अगले सप्ताह तक निलंबन वापस हो जाए।
एक केंद्रीय मंत्री का कहना है कि लोकसभा अध्यक्ष विपक्ष के सांसदों के आचरण से बहुत दु:खी हैं। वह सदन में भी दो दिन से सभापति के आसन पर नहीं आ रहे हैं। कांग्रेस पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि सभापति एक अध्यक्ष की तरह स्वतंत्रता से अपना काम नहीं कर पा रहे हैं।
उनके विपक्ष के सांसदों की बजाय अधिक परेशानी सत्ता पक्ष से हैं, लेकिन वह इसे बयां नहीं कर पा रहे हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों का कहना है कि इसका उत्तर लोकसभा अध्यक्ष ही दे सकते हैं। आसन के खिलाफ कुछ भी बोलना संसदीय आचरण के विरुद्ध है। लोकसभा सचिवालय के अधिकारियों को भी लोकसभा अध्यक्ष के दो दिन से सदन में न होने के कारण का नहीं पता।