सेना में सैनिकों की संख्या में डेढ़ लाख की कटौती करने की खबरों पर कांग्रेस ने सरकार से सवाल किया है। पार्टी ने कहा कि सैनिकों की संख्या में कटौती के पीछे खर्च बचाने का आधार बताया जा रहा है, लेकिन सच्चाई यह है कि इससे ज्यादा खर्च वह अपने प्रचार पर खर्च कर देती है। ऐसे में सैनिकों की संख्या में कटौती की जगह उसे अपने प्रचार पर लगाम लगानी चाहिए।
कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने बुधवार को दिल्ली में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि भारत सरकार इस समय देश की सुरक्षा पर न्यूनतम खर्च कर रही है। यह खर्च सकल घरेलू उत्पाद का महज 1.58 फीसदी है जो 1962 के बाद आज तक का सबसे कम खर्च है।
अब वह इस खर्च में भी कटौती करने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि लगभग 1.5 लाख सैनिकों की कटौती से लगभग 5 हजार करोड़ रुपये के बचत की बात कही जा रही है। लेकिन सरकार अपने प्रचार पर ही प्रतिवर्ष पांच से सात हजार करोड़ रुपये खर्च कर देती है। सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीरों को बदलते रहने के लिए प्रति माह 60 करोड़ रुपये का खर्च किया जाता है। ऐसी स्थिति में सैनिकों की संख्या में कटौती की बजाय उसे अपने प्रचार पर खर्च कम क्यों नहीं करना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने कहा कि जब शहादत की बात आती है तो देश के सैनिक सामने आते हैं, लेकिन जब श्रेय लेने की बात आती है तो मोदी सरकार और भाजपा खुद सामने आ जाती है। उन्होंने कहा कि जब से यह सरकार सत्ता में आई है, सिर्फ जम्मू-कश्मीर में 410 जवान मारे जा चुके हैं, 243 सीआरपीएफ जवानों की शहादत नक्सलियों से मुकाबला करते समय हुई है। ऐसे समय में जवानों का मनोबल बढ़ाने की जगह उनका मनोबल तोड़ने वाला फैसला सरकार ले रही है जिससे उसे बचना चाहिए।
सिंघवी ने कहा कि देश के सामने चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं और उससे निबटने के लिए सैनिकों को और अधिक दक्ष किये जाने की जरुरत है। सुरक्षा पर बनी पार्लियामेंट स्टैंडिंग कमेटी ने इसके बारे में अपनी चिंता व्यक्त की है। कमेटी के सामने रखी गई एक रिपोर्ट के मुताबिक सेना के 68% उपकरण पुराने हो चुके हैं और उन्हें बदले जाने की जरुरत है। सरकार को उन पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि इससे देश की सुरक्षा खतरे में पड़ती है।