असम विधानसभा के स्पीकर बिस्वजीत दैमारी के फैसले का विरोध करने के बाद कांग्रेस विधायक शर्मन अली अहमद को सोमवार को दिनभर के लिए विधानसभा से निलंबित कर दिया गया।
12वें नंबर की सीट पर अहमद ने बारपेटा जिले के सतराकानारा के 45 परिवारों को बेदखल करने से संबंधित एक सवाल पूछा और आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर सदन को गुमराह किया है।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री जोगन मोहन ने कहा कि सरकार ने केवल 400 बीघा (132 एकड़ से अधिक) जमीन को मंजूरी दी है और उस क्षेत्र के बाहर किसी को भी बेदखल नहीं किया गया, अहमद ने आरोप लगाया कि चिह्नित क्षेत्र के बाहर 17 परिवारों को प्रशासन ने 26 दिसंबर को अभ्यास के दौरान विस्थापित कर दिया।
अहमद ने कहा, 400 बीघा के बाहर बेदखली करने में किसका दोष था? यह एक गंभीर मामला है और सभा को गुमराह किया गया। उन्होंने कहा, मैं स्पीकर से इस मामले की जांच के लिए सदन की एक समिति गठित करने का अनुरोध करता हूं।
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दैमारी ने विपक्षी विधायक से बिना किसी सबूत के इस तरह के दावे नहीं करने का अनुरोध किया, लेकिन बयानों को हटाने से इनकार किया। मोहन के जवाब के बाद जब स्पीकर अगले प्रश्न पर गए तो अहमद ने कहा कि उन्हें नियम के अनुसार दूसरा पूरक प्रश्न करने का मौका मिलना चाहिए। हालांकि, दैमारी ने इसे स्वीकार नहीं किया और अगले विधायक से उनका सवाल पूछने को कहा। इस पर अहमद सदन के बीचोंबीच आ गए और दूसरे पूरक प्रश्न की मांग करते रहे।
एआईयूडीएफ विधायक रफीकुल इस्लाम ने अहमद का समर्थन किया और विधानसभा स्पीकर को बताया कि सदन की कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) के फैसले के अनुसार एक विधायक को दो पूरक प्रश्न करने के मौके मिलते हैं।
स्पीकर दैमारी ने कहा, मैंने नियम 49 के अनुसार निर्णय लिया है।उन्होंने कहा कि कृपया सदन को बाधित न करें और इस तरह के आरोप न लगाएं। जब कांग्रेस विधायक सदन के बीचोंबीच से अपनी बातें उठाते रहे तो स्पीकर ने उन्हें दिनभर के लिए निलंबित कर दिया। इसके बाद मार्शल अहमद को सदन से बाहर ले गए।
कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया, सोनितपुर जिला प्रशासन ने परिवारों पर बेरहमी से हमला किया जैसे कि वे विदेशी हों। बेदखली के बाद जब वे राहत शिविरों में रह रहे थे, सोनितपुर जिला प्रशासन नगांव जिले के अंदर आया और उनके शिविरों को भी तोड़ दिया। राहत शिविरों को खाली कराने के दौरान महिलाओं सहित कुछ प्रभावित लोग घायल हो गए और अंदर सोते समय उन पर टिन की चादरें गिर गईं।
माकपा के मनोरंजन तालुकदार ने कहा कि बेदखली का सामना करने वाले अधिकांश लोग बाढ़ पीड़ित थे और उनकी भूमि ब्रह्मपुत्र और अन्य नदियों द्वारा कटाव में बह गई थी। कांग्रेस विधायक नुरुल हुदा ने दावा किया, 'ये लोग 1960 के दशक से इस क्षेत्र में रह रहे हैं, जब इसे अभयारण्य घोषित नहीं किया गया था। अन्य स्थानों पर उनकी भूमि कटाव में बह गई।