केरल में अगला मुख्यमंत्री तय करने के लिए कांग्रेस के विधायक दल की गुरुवार को पार्टी मुख्यालय में हुई। कांग्रेस ने 2026 के विधानसभा चुनाव में 63 सीटें जीती हैं। इसी को देखते हुए यह बैठक की गई। बैठक में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (एआईसीसी) के पर्यवेक्षक मुकुल वासनिक और अजय माकन भी मौजूद रहे। ये दोनों नेता बुधवार से ही तिरुवनंतपुरम में हैं।
चांडी ओमन ने कांग्रेस विधायक दल की बैठक में हिस्सा लिया। बैठक के बाद उन्होंने कहा, कांग्रेस की एक तय प्रक्रिया है। हम केरल की जनता की ओर से चुने गए विधायक हैं। हमने अपनी राय पार्टी के सामने रख दी है और उसी आधार पर पार्टी सही फैसला लेगी। उन्होंने कहा, मैंने अपनी बात पार्टी नेतृत्व को बता दी है। मैं सार्वजनिक रूप से इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहता। मेरा नेतृत्व सही समय पर फैसला करेगा।
माकन और वासनिक ने वरिष्ठ नेताओं से की मुलाकात
इससे पहले दिन में मुकुल वासनिक और अजय माकन ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की और उनसे चर्चा की। इनमें वीएम सुधीरन, के सुधाकरन, रमेश चेन्निथला और वीडी सतीशन शामिल थे।
किन नामों पर किया जा रहा विचार?
कांग्रेस विधायक दल की बैठक के बाद एआईसीसी पर्यवेक्षक अपनी रिपोर्ट पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को सौंपेंगे, जिसके बाद मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल मुख्यमंत्री पद के लिए वीडी सतीशन, रमेश चेन्निथला और कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के नामों पर विचार किया जा रहा है।
पार्टी के लिए एक को चुनना क्यों मुश्किल
मुख्यमंत्री पद के ये तीनों ही दावेदार 'नायर समुदाय' से आते हैं और ये तीनों नेता कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत के करुणाकरण के शिष्य रह चुके हैं। इसलिए पार्टी के लिए किसी एक को चुनना बहुत मुश्किल फैसला हो गया है।
क्या अनुभव दिलाएगा चेन्निथला को मुख्यमंत्री की कुर्सी?
वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला ने इस चुनाव में संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) की अभियान समिति के अध्यक्ष के रूप में काम किया था। उन्होंने अपनी हरिपाद सीट से भारी मतों से जीत दर्ज की है। उनके समर्थकों का दावा है कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने ही उन्हें युवा कांग्रेस में मौका देकर राष्ट्रीय स्तर का नेता बनाया था, इसलिए उनके अनुभव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनका यह भी कहना है कि बाकी दोनों दावेदार (सतीशन और वेणुगोपाल) कभी राजनीति में चेन्निथला के ही पीछे चलते थे।
नतीजों के बाद चेन्निथला ने कहा है कि इस शानदार जीत का पूरा श्रेय पार्टी के नेता राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सोनिया गांधी को जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी की 'पांच गारंटियों' के कारण ही पार्टी को चुनाव में इतनी बड़ी सफलता मिली है।
सतीशन को मिलेगा नवनिर्वाचित विधायकों का साथ?
वहीं, वीडी सतीशन ने इस चुनाव में विपक्ष के नेता के तौर पर गठबंधन का नेतृत्व किया। उन्होंने अपनी पारवूर सीट से बहुत ही शानदार जीत दर्ज की है। ऐसा माना जा रहा है कि सतीशन के पास कांग्रेस के जीते हुए विधायकों का बहुत ज्यादा समर्थन नहीं है। इसके बावजूद उनके समर्थकों का दावा है कि उन्हें गठबंधन के सबसे बड़े सहयोगी दल 'इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग' और आम जनता का पूरा साथ मिला है। सतीशन के गढ़ एर्नाकुलम से जीते एक नेता का कहना है कि 2021 में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) से हारने के बाद सतीशन ने ही पार्टी को संभाला और इस शानदार जीत तक पहुंचाया है, इसलिए जनता की भावनाओं का सम्मान होना चाहिए।
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बिना चुनाव लड़े भी केसी वेणुगोपाल रेस में कैसे हैं सबसे आगे?
- अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने खुद यह विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा था। इसके बावजूद वह मुख्यमंत्री पद के सबसे प्रबल और मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।
- उनके समर्थकों का कहना है कि मुख्यमंत्री चुनने के लिए सिर्फ लोकप्रियता काफी नहीं है, बल्कि पार्टी के विधायकों का साथ होना बहुत जरूरी है।
- केरल में कांग्रेस के पास अकेले 63 विधायक हैं और दावा है कि इनमें से ज्यादातर विधायक वेणुगोपाल को ही मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं।
- वेणुगोपाल को राहुल गांधी का बेहद वफादार और करीबी माना जाता है, इसलिए उनकी दावेदारी सबसे ज्यादा मजबूत है।
पार्टी की ऐतिहासिक जीत में वेणुगोपाल की क्या रही है भूमिका?
वेणुगोपाल के करीबियों का दावा है कि इस जीत के पीछे असली मेहनत उन्हीं की है और उन्होंने चुनाव में बहुत अहम भूमिका निभाई है। राज्य में 'इंदिरा गारंटी' अभियान को घर-घर तक पहुंचाने और सफल बनाने में उनकी सबसे बड़ी भूमिका रही। उन्होंने ही पूरे राज्य में लोगों के बीच सर्वे कराकर एकदम सही उम्मीदवारों का चुनाव किया। चुनाव के दौरान पार्टी के अंदर चल रहे झगड़ों को दूर करने, बागियों को रोकने और तीन स्तर की निगरानी प्रणाली बनाने का काम भी उन्होंने ही किया। वेणुगोपाल ने ही सभी सहयोगी दलों को एक साथ जोड़े रखा और सीपीआई (एम) के नाराज नेताओं को अपने गठबंधन में शामिल किया।
राज्यपाल ने भंग की15वीं विधानसभा
केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ र्लेकर ने राज्य की 15वीं विधानसभा को भंग कर दिया है। इसकी जानकारी गुरुवार को जारी एक राजपत्र (गजट) अधिसूचना के जरिये दी गई।
अधिसूचना के अनुसार, राज्यपाल ने यह फैसला बुधवार को लिया था। इसमें कहा गया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(बी) के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए उन्होंने 6 मई 2026 से 15वीं केरल विधानसभा को भंग कर दिया है।
यह कदम नौ अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद उठाया गया है, जिसमें यूडीएफ ने 140 में से 102 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया। एलडीएफ को बड़ा नुकसान हुआ और वह केवल 35 सीटें ही जीत सका। जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) को तीन सीटें मिलीं। चुनाव नतीजों के बाद मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने इस्तीफा दे दिया था।