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कांग्रेस में हाई कमान बोल रहे हैं, कुछ दिन शांत रह जाइए सब ठीक हो जाएगा

Sun, 30 Aug 2020 08:40 PM IST
गौरव पाण्डेय शशिधर पाठक, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल
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कांग्रेस पार्टी का मौजूदा कोई महासचिव या गुट 23 के कुछ नेताओं को छोड़कर अन्य कोई नेता कुछ नहीं बोलना चाहता। सीडब्ल्यूसी (कांग्रेस कार्य समिति) की बैठक में मौजूद रहे एक नेता का कहना है कि पार्टी के आंतरिक मामलों में कोई बयान न देने की रणनीति ही सबसे अच्छी है। आपस में तू-तू, मैं-मैं में रखा क्या है? पार्टी के एक अन्य महासचिव ने भी कहा कि उन्हें नहीं पता गुलाम नबी आजाद और सिब्बल क्यों ऐसा बोल रहे हैं। राज्यसभा में पार्टी के उपनेता आनंद शर्मा ने कहा कि वह फोन पर कुछ नहीं कहना चाहते। उन्हें जहां कहना होगा, अपनी बात रखेंगे। पार्टी की महिला विंग की अध्यक्ष सुष्मिता देव का भी कहना है कि आंतरिक मामले पार्टी के फोरम पर उठाए जाते हैं। फिलहाल कुछ दिन रुकिए, यह कांग्रेस पार्टी है, यहां लोकतंत्र है और जल्द ही सब ठीक हो जाएगा।

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चुप रहिए! हाई कमान बोल रहे हैं...
कांग्रेस पार्टी के एक सचिव ने कहा कि मैं छोटा नेता हूं। पत्र लिखने वाले जिन 23 नेताओं की बात हो रही है, उनमें एक-दो को छोड़ दीजिए तो बाकी सब हाई कमान हैं। पार्टी की रीतियां-नीतियां तय करते हैं। सूत्र कहना है कि पार्टी के हित या अहित में जब वह बोल रहे हैं तो हम क्या बोलें। उन्हें ही बोलने दीजिए, जल्द सब ठीक हो जाएगा। पार्टी के एक युवा सांसद का कहना है कि वरिष्ठ नेताओं की पहल से जो कांग्रेस के भीतर पिछले तीन सप्ताह में हुआ, यह भाजपा को लंबे समय तक फायदा पहुंचाएगा। उन्हें पता है कि भाजपा इसे राहुल गांधी को लेकर पार्टी के बड़े नेताओं के विरोध के तौर पर प्रचारित कर रही है। इससे राहुल गांधी का भले कुछ न बिगड़े, लेकिन कांग्रेस का बड़ा नुकसान और भाजपा का बहुत बड़ा फायदा होगा।

गुलाम नबी ने 50 साल विपक्ष में बैठने की बात पार्टी के बाहर क्यों कही?
सीडब्ल्यूसी की बैठक में उपस्थित रहे सूत्र का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने खुद पार्टी के भीतर कामकाज में बदलाव की बात स्वीकार की। उन्होंने माना कि परिवर्तन करना पड़ेगा। काफी कुछ ठीक करने की आवश्यकता है। सूत्र का कहना है कि सीडब्ल्यूसी में सबकुछ ठीक हो गया था, लेकिन पता नहीं क्यों बाहर आने के बाद कपिल सिब्बल और गुलाम नबी आजाद जैसे वरिष्ठ नेताओं ने बयानबाजी जारी रखी। मीडिया में बयान दे रहे हैं। 
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सूत्र का कहना है कि गुलाम नबी जैसे नेता का यह बयान कि कांग्रेस 50 साल विपक्ष में बैठेगी, कार्यकर्ताओं को निराश करेगा। पता नहीं उनके जैसे समझदार नेता ने ऐसा बयान क्यों दिया। जबकि खुद राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने उनसे फोन पर भी बात की थी। पार्टी के एक अन्य राज्य के प्रभारी का कहना है कि पार्टी में संगठनात्मक मजबूती से भला कौन इनकार कर रहा है। यह किया भी जा रहा है। लोग सवाल उठाने की बजाय जिम्मेदारी के साथ आगे आएं।

'अंगुलियां तो उठेंगी, इससे क्या डरना'
पार्टी के युवा नेता हैं। दक्षिण भारत से आते हैं। सांसद हैं। कहते हैं अंगुलियां उठने से क्या डरना? अगर किसी की शिकायत पार्टी अध्यक्ष से है तो रहे, राहुल गांधी से है तो रहे? सच यह है कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारों के खिलाफ बोल कौन रहा है? पार्टी के प्रचार की कमान किसके पास है? सरकार की नीतियों पर अंगुली किसने उठाई? साफ सी बात है। करने वाला या तो सही करेगा या फिर गलत करेगा। लोगों का काम अपना योगदान देने से ज्यादा अंगुलिया उठाने का होता है। सूत्र का कहना है कि एक समय के बाद लोगों से स्थिति बर्दाश्त नहीं होती तो शोर मचाने लगते हैं। मेरी उन्हें सलाह है कि धैर्य से काम लें। उन्हें चाहिए कि पार्टी को मजबूत बनाने में अपना योगदान दें।

'हम तो चुप रहेंगे, उन्हें बोलने दीजिए'
कांग्रेस के अधिकांश नेताओं ने मुंह पर ताला लगा लिया है। एक महासचिव ने कहा कि हम तो चुप ही रहेंगे। उन्हें बोलने दीजिए। एक राज्य के प्रभारी ने कहा कि वह सवाल उठा रहे हैं और हम उन्हें गाली दें, आखिर यह कौन सी समझदारी हैं। वे हमारी पार्टी के नेता हैं। हम उन्हें कुछ कहेंगे, वह अपनी और नाराजगी जाहिर करेंगे। इसमें रखा क्या है? राहुल गांधी के कार्यालय से जुड़े एक सूत्र का कहना है कि भाजपा में कोई नेता इतना बोलकर दिखाए? सूत्र का कहना है कि कांग्रेस पार्टी लोकतांत्रिक पार्टी है। हमारे यहां हर कोई अपनी बात रख सकता है। अच्छा होता कि यह बातें पार्टी फोरम पर होती। सूत्र का कहना है कि 14 सितंबर से संसद का मानसून सत्र शुरू होने वाला है। आप देखेंगे कि उसमें सबकुछ ठीक चलेगा।

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