महाराष्ट्र में कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने बुधवार को सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण को पुरानी बातों का दोहराव और शब्दों का बाजार बताया। वडेट्टीवार ने कहा कि यह भाषण पूरी तरह से निराशाजनक है। विधानसभा में कांग्रेस पार्टी का पक्ष रखते हुए वडेट्टीवार ने महायुति सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने राज्यपाल को सदन के सामने खुला झूठ पेश करने के लिए मजबूर किया। यह महाराष्ट्र की जनता के साथ धोखा है।
महापुरुषों का अपमान करने का आरोप
वडेट्टीवार ने कहा कि सरकार राजनीतिक दिखावे के लिए छत्रपति शिवाजी महाराज, महात्मा फुले, शाहू महाराज और डॉ. बी.आर. आंबेडकर का नाम लेती है। लेकिन अपने कामों से लगातार उनकी विचारधाराओं का अपमान करती है। उन्होंने कहा, "इस सरकार ने उन लोगों को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया, जिन्होंने राजभवन में बैठकर छत्रपति शिवाजी महाराज और सावित्रीबाई फुले का अपमान किया था।" उन्होंने यह भी कहा कि डॉ. आंबेडकर ने सभी को समानता से जीने का अधिकार दिया, लेकिन आज के मंत्री सांप्रदायिक तनाव भड़काने वाले बयान दे रहे हैं।
अर्थव्यवस्था के आंकड़ों पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता ने सरकार के आर्थिक अनुमानों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार पहले 2024 तक 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का वादा कर रही थी। अब वे उस वादे को भूलकर 2047 के विजन की बात कर रहे हैं। उन्होंने पूछा, "वे 1 ट्रिलियन डॉलर का वादा भूल गए हैं और अब 5 ट्रिलियन डॉलर की बात कर रहे हैं। क्या मौजूदा लक्ष्यों के परिणाम दिखाए बिना 2047 के बारे में बात करना सही है?" उन्होंने इन आंकड़ों को महज हवाई बातें बताया।
'कमीशन' वाली सरकार के गंभीर आरोप
वडेट्टीवार ने शिक्षा की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के 2,200 स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं और मराठी माध्यम के स्कूल बंद किए जा रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार एंबुलेंस की मरम्मत के लिए भी पैसे नहीं जुटा पा रही है, लेकिन 5 ट्रिलियन डॉलर की बातें करती है।
उन्होंने सरकार पर 'कमीशन' के लिए काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि स्कूल बैग के ठेके पसंदीदा लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए दवा कंपनियों को दिए जा रहे हैं। उन्होंने सरकार पर ताडोबा टाइगर रिजर्व और नागपुर वन प्रभाग की जमीन उद्योगपतियों को सौंपने का भी आरोप लगाया। वडेट्टीवार ने किसानों के संकट को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि यवतमाल और अमरावती में किसान कर्ज चुकाने के लिए अपनी किडनी बेचने को मजबूर हैं, लेकिन राज्यपाल के भाषण में 'कर्जमुक्ति' का कोई जिक्र नहीं था।
उन्होंने दावोस में विश्व आर्थिक मंच पर हुए समझौतों को 'बढ़े-चढ़े आंकड़े' बताया। उन्होंने सवाल किया कि भारतीय और महाराष्ट्र की कंपनियों के साथ समझौते करने के लिए दावोस जाने की क्या जरूरत थी। उन्होंने इन विदेश यात्राओं से मिले असल रोजगार पर एक श्वेत पत्र की मांग की।