सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक कड़वाहट लगातार बढ़ रही है। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने चाहे राफेल लड़ाकू विमान सौदे में कदाचार का मामला हो या डोकलाम और बाद में चीन की घुसपैठ या फिर दिल्ली की सीमा पर डटे किसानों का मामला हो, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सीधे निशाने पर लिया। हालांकि प्रधानमंत्री, उनकी कैबिनेट के मंत्री, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, और सत्ता पक्ष के अन्य नेता राहुल गांधी को कभी गंभीरता से नहीं लेते। राजनीतिक हमला बोलकर उनकी खिल्ली उड़ाते हैं। एक बार फिर राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री और उनकी सरकार को देश, मुद्दे, अर्थव्यवस्था, किसानों से जुड़े मसले, विदेश नीति और सुरक्षा से जुड़े मामलों में दूरदृष्टि रहित बताया है। राहुल के इन आरोपों पर भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पलटवार किया है।
राहुल गांधी प्रधानमंत्री के दूरदर्शी होने पर सवाल खड़ा कर रहे थे। अपनी बगल में बैठे मीडिया विभाग के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला का अचानक उन्होंने हाथ पकड़ा और ऊपर उठा दिया। राहुल गांधी ने कहा कि क्या कोई प्रधानमंत्री दूसरे देश में जाकर वहां के राष्ट्रपति का इस तरह से हाथ उठाकर कहता है कि अगली बार ट्रंप सरकार? आप दूसरे देश में जाकर वहां की राजनीति का एजेंडा सेट कर रहे हैं? इतना कहते ही हॉल ठहाकों से भर गया। इस पर सुरजेवाला को हालात सामान्य करने के लिए कहना पड़ा कि वह डोनाल्ड ट्रंप नहीं जो बाइडन हैं।
राहुल गांधी ने इसी तरह से चीन के डोकलाम के बाद लद्दाख क्षेत्र में और भारत के अन्य हिस्सों में घुसपैठ के प्रयासों को लेकर भारत सरकार पर हमला बोला। राहुल गांधी का कहना है कि चीन एक दृष्टिकोण के साथ दुनिया को दो ध्रुवीय बनाने पर काम कर रहा है और हमारे पास उसके सामानांतर दूरदृष्टि ही नहीं है।
यह राहुल गांधी की बहुत बड़ी टीस है, जो सामने आई है। वह और कांग्रेस पार्टी के नेता केन्द्र सरकार के पास अपनी मांग लेकर आने वालों का समर्थन करते हैं, मामले को उठाते हैं तो केन्द्र सरकार उन्हें (प्रदर्शन करने वालों को) कांग्रेस पार्टी से जोड़कर दुश्मन बना देती है। चाहे बेरोजगारी का मुद्दा हो, जेएनयू का मामला हो, कोविड-19 संक्रमण के दौरान के मुद्दे रहे हों या फिर तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसान आंदोलन का मामला हो। राहुल गांधी का कहना है कि सरकार दुश्मन बनाने में जरा भी देर नहीं लगाती। लेकिन फिर भी वह अपनी आवाज उठाना जारी रखेंगे। राहुल गांधी ने कहा कि वह अकेले भी आवाज उठाना जारी रखेंगे। उनके पास केन्द्र सरकार और भाजपा की तरह सोशल मीडिया पर खर्च करने के लिए करोड़ों रुपये नहीं हैं। फिर भी वह अपना प्रयास जारी रखेंगे। वह डरने वाले नहीं हैं। उन्हें भरोसा है कि देश में कहीं न कहीं से ऊर्जा आएगी, आवाज उठेगी। इसे दबाया नहीं जा सकता।
राहुल गांधी के हमले की जद में आज भी सीधे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ही थे। जेपी नड्डा के सवाल का जिक्र आने पर राहुल ने कहा कि वह भला इसका जवाब क्यों दें? कौन हैं नड्डा? क्या वह हिन्दुस्तान के प्रोफेसर हैं? इसी तरह से पत्रकार अर्णब गोस्वामी के चैट से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि किसने दी थी उन्हें ऑपरेशन बालाकोट की समय से पहले जानकारी? पुलवामा हमले को कैसे उन्होंने चैट में कहा कि अच्छा हुआ? कौन दे रहा था इतनी गोपनीय सूचना और किसे पुलवामा हमले के बाद सुरक्षा बलों की शहादत पर चुनाव में जीत मिलने की उम्मीद में अच्छा लग रहा था?
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने भाजपा नेताओं के आरोप पर खुलकर कटाक्ष किया। राहुल गांधी ने जवाब में कहा कि यूपीए सरकार थी तो भट्ठा-पारसौल कौन गया था? भूमि अधिग्रहण संशोधन और पुनर्वास विधेयक का किसने विरोध किया था? किसने किसानों की अधिगृहित करने वाली जमीन पर सरकार से पांच गुना मुआवजा देने की मांग की थी। राहुल गांधी ने कहा, सरकार किसानों को बातचीत के नाम पर लटकाने, थकाने, तोड़ने पर तुली हुई है। उन्होंने एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी की सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह हिन्दुस्तान की व्यवस्था को राजनीतिक लाभ के लिए छिन्न-भिन्न करने, चीड़ने-फाड़ने में लगी हुई है। किसानों के मुद्दे को कोर्ट में घसीट रही है। इस दौरान कांग्रेस पार्टी ने खेती का खून, तीन काले कानून शीर्षक से 18 पेज की बुकलेट भी जारी की।
राहुल गांधी ने इस तरह का वाक्य बोलना क्यों जरूरी समझा वही जानें। उनका यह वाक्य लगातार चर्चा का विषय बना है। कांग्रेस सांसद ने केन्द्र सरकार द्वारा केन्द्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग की तरफ ईशारा करते हुए कहा कि वह साफ, सुथरे आदमी हैं। उन्होंने कहा, मेरा करेक्टर है। मैं न नरेन्द्र मोदी से डरता हूं, न इन लोगों से। मुझे यह छू नहीं सकते। इस बात को समझिए। हां, गोली से मार सकते हैं...वह बात अलग है। मगर छू नहीं सकते। राहुल ने कहा कि वह सच्चे देश भक्त हैं। अपने देश की रक्षा करेंगे और करते जाएंगे। पूरा देश दूसरी तरफ खड़ा हो जाए तब भी उन्हें फर्क नहीं पड़ता और वह अकेले खड़े रहकर भी अपना काम करते रहेंगे।