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अकाउंट ब्लॉक: राहुल गांधी को 'ट्विटर' से मुआवजा मांगने का अधिकार है, कोर्ट में केंद्र और कंपनी को बना सकते हैं पार्टी

सार

सुप्रीम कोर्ट के वकील पवन दुग्गल कहते हैं, सोशल मीडिया का दायरा, सोशल मीडिया में ही रहे तो ठीक है। अगर इसके जरिए प्रजातंत्र में छेड़खानी होती है तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए...
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राहुल गांधी - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)
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विस्तार
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कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी सोशल मीडिया 'अकाउंट ब्लॉक' होने के कारण ट्विटर से खासे नाराज हैं। शुक्रवार को उन्होंने वीडियो जारी कर इस प्रकरण को 'ट्विटर का खतरनाक खेल' बताया है। राहुल ने कहा है, 'मेरा ट्विटर अकाउंट बंद कर वे राजनीतिक प्रक्रिया में दखलंदाजी कर रहे हैं। एक कंपनी हमारी राजनीति को परिभाषित करने को बिजनेस बना रही है। एक राजनीतिज्ञ के तौर पर मैं इसे पसंद नहीं करता। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और आईटी मामलों के विशेषज्ञ पवन दुग्गल ने इस बाबत कहा, अगर राहुल गांधी को लगता है कि वाकई इस मामले में ट्विटर कुछ गलत कर रहा है तो उन्हें मुआवजा पाने का अधिकार है। वे ट्विटर की दखलअंदाजी को कानूनी तौर पर चुनौती दे सकते हैं। धारा 226 के तहत हाईकोर्ट में और आर्टिकल 32 के अंतर्गत सुप्रीम कोर्ट में केस को ले जाने का प्रावधान है। इस मामले में राहुल गांधी, केंद्र सरकार और ट्विटर, दोनों को पार्टी बना सकते हैं।

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सुप्रीम कोर्ट के वकील पवन दुग्गल कहते हैं, सोशल मीडिया का दायरा, सोशल मीडिया में ही रहे तो ठीक है। अगर इसके जरिए प्रजातंत्र में छेड़खानी होती है तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। आईटी कानूनों के तहत भले ही ट्विटर एक अंतर मध्यस्थ की भूमिका निभाता है, लेकिन जब वह अंधाधुंध तरीके से विपक्ष को टारगेट करने लगता है या सीमाओं से परे जाकर सरकार का पक्ष रखने लगता है तो उसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। सोशल मीडिया में नियमानुसार कोई भी व्यक्ति अपनी बात कह सकता है। अगर सोशल मीडिया अपने दायरे से बाहर निकलकर किसी देश की राजनीतिक व्यवस्था में दखलअंदाजी करता है तो वह गलत है। उसे कानूनी तौर पर चैलेंज किया जा सकता है। पीड़ित व्यक्ति ऐसे केस में मुआवजा पाने का हकदार है। विपक्षी दल, ट्विटर की कार्रवाई से असहमत हैं, तो वे हाईकोर्ट के समक्ष जाकर अपनी बात रखें।

बतौर दुग्गल, हर व्यक्ति को संविधान की धारा 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मिली है। हालांकि यह असीमित नहीं है। इस पर कुछ प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। राहुल गांधी व दूसरे नेता, जिनका ट्विटर अकाउंट बंद हुआ है, उन्हें लगता है कि यह कार्रवाई संवैधानिक व्यवस्था के दायरे से बाहर जा चुकी है तो वे उसे चुनौती दे सकते हैं। धारा 226 के तहत हाईकोर्ट में और आर्टिकल 32 के अंतर्गत सुप्रीम कोर्ट में इस केस पर सुनवाई होने का प्रावधान है। खास बात यह है कि यहां पर केवल ट्विटर को ही अदालत में पार्टी नहीं बनाया जाएगा, बल्कि केंद्र सरकार को भी अदालत में बुलाया जा सकता है।

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पवन दुग्गल बताते हैं, ऐसे मामले में केंद्र सरकार यह कहकर खुद को दूर नहीं रख सकती कि ये तो सोशल मीडिया प्लेटफार्म और राहुल गांधी के बीच का मामला है। कानून में ऐसे प्रावधान हैं, जिनके आधार पर केंद्र सरकार की जवाबदेही तय होती है, उसके अंतर्गत केंद्र सरकार को पार्टी बना सकते हैं। ट्विटर जब आईटी एक्ट के तहत काम नहीं कर रहा था तो सरकार ने उसमें क्या कार्रवाई की है। क्या वह चुपचाप बैठकर सारा तमाशा देखती रही। अदालत में यह बताना पड़ेगा कि उसने इस मामले में क्या किया है। ये सब तभी संभव है जब राहुल गांधी या कांग्रेस पार्टी इस मामले को पुख्ता सबूतों के साथ अदालत में ले जाते हैं।

दूसरी तरफ, राहुल गांधी ने खुद के और कांग्रेस पार्टी के दूसरे नेताओं के ट्विटर अकाउंट बंद करने को लेकर कहा, यह देश के लोकतंत्र पर हमला है। इसे सिर्फ राहुल गांधी पर हमला न समझा जाए। मेरे 19 से 20 मिलियन फॉलोअर हैं। कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ट्विटर अकाउंट बंद कर वे उनसे मेरा ओपिनियन जानने का हक छीन रहे हैं। ट्विटर एक न्यूट्रल प्लेटफॉर्म है, यह सही नहीं है। 'ट्विटर' अब भेदभाव करने वाला प्लेटफॉर्म बन गया है। इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने फेसबुक पर लिखा, 'जब हमारे नेताओं को जेलों में बंद कर दिया गया, हम तब नहीं डरे तो अब ट्विटर अकाउंट बंद करने से क्या खाक डरेंगे। हम कांग्रेस हैं, जनता का संदेश है, हम लड़ेंगे, लड़ते रहेंगे। अगर बलात्कार पीड़ित बच्ची को न्याय दिलाने के लिए आवाज उठाना अपराध है, तो यह अपराध हम सौ बार करेंगे। जय हिंद, सत्यमेव जयते।

ट्विटर ने पिछले शनिवार को राहुल गांधी का अकाउंट बंद कर दिया था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का कहना था, यह कार्रवाई इसलिए की गई है क्योंकि राहुल गांधी ने दिल्ली की रेप पीड़ित बच्ची के मां-पिता की फोटो शेयर की थी। यह ट्विटर के नियमों का उल्लंघन है। राहुल गांधी ने जो ट्वीट किया था, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने उस बाबत दिल्ली पुलिस और ट्विटर से शिकायत की थी। आयोग का कहना था कि यह जुवेनाइल जस्टिस एक्ट और प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट का उल्लंघन है। इसके लिए राहुल गांधी के खिलाफ कार्रवाई की जाए। कांग्रेस पार्टी ने कहा, राहुल गांधी के अलावा कई अन्य वरिष्ठ नेताओं के ट्विटर अकाउंट भी बंद कर दिए गए थे। इनमें अजय माकन, सुष्मिता देव, मणिकम टैगोर व जितेंद्र सिंह आदि शामिल हैं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर राहुल गांधी की फोटो लगा दी। उसके बाद कई दूसरे नेताओं ने भी इसे फ़ॉलो करना शुरू कर दिया।
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