कांग्रेस पार्टी ने महिला आरक्षण बिल को लेकर अपना रुख एकदम कड़ा कर लिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता के. राजू ने कहा है कि कांग्रेस की दो मांगे अटल हैं। पहला- लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों पर ही महिलाओं को तुरंत आरक्षण मिले और दूसरा- महिलाओं के कोटे के अंदर ही ओबीसी महिलाओं को भी अलग से कोटा दिया जाए। उन्होंने साफ किया कि इन दोनों मांगों पर कांग्रेस सरकार से कोई समझौता नहीं करेगी।
सोनिया गांधी ने 2023 में महिला आरक्षण पर क्या कहा था?
के. राजू ने याद दिलाया कि जब 2023 में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (महिला आरक्षण बिल) पर चर्चा हो रही थी, तब सोनिया गांधी ने भी यही आवाज उठाई थी। सोनिया गांधी ने मांग की थी कि इस कानून को बिना किसी देरी के तुरंत लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि महिलाओं के कोटे के अंदर ओबीसी महिलाओं को भी आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। राजू ने जोर देकर कहा कि कांग्रेस आज भी सोनिया गांधी की उसी मांग पर पूरी तरह से अड़ी हुई है।
कांग्रेस ने सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग क्यों की है?
कांग्रेस ने इसी हफ्ते भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से मांग की थी कि महिला आरक्षण को लेकर तुरंत एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए। पार्टी चाहती है कि 2029 से पहले, लोकसभा की मौजूदा क्षमता (543 सीटों) पर ही महिलाओं का कोटा कैसे लागू किया जाए, इस पर चर्चा हो। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों का आरोप है कि मोदी सरकार महिला आरक्षण के बहाने देश में परिसीमन लागू करना चाहती है।
कांग्रेस यह भी मांग कर रही है कि सरकार इसी मानसून सत्र में एक नया बिल लाकर इस कोटे को तुरंत लागू करे। बता दें कि सरकार का 131वां संविधान संशोधन बिल, जिसमें लोकसभा की सीटें 850 करने की बात थी, वह हाल ही में निचले सदन में गिर गया है। (298 सदस्यों ने पक्ष में और 230 ने विपक्ष में वोट किया था, जबकि इसे पास होने के लिए 352 वोटों की जरूरत थी।)