कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने एक बार फिर से पार्टी के प्रति अपनी नाराजगी को जाहिर किया है। हालांकि, उन्होंने खुलकर कुछ भी नहीं कहा, लेकिन नई पार्टी बनाने के सवाल पर वह इतना जरूर कह गए कि राजनीति में कभी भी कुछ भी हो सकता है। एनडीटीवी से बातचीत के दौरान उन्होंने कश्मीर में अलग पार्टी बनाने के सवाल पर कहा कि- ऐसा कुछ भी नहीं है। मेरी नई पार्टी बनाने की कोई मंशा नहीं है। मगर राजनीति में कुछ कहा नहीं जा सकता।
आज का कांग्रेस नेतृत्व आलोचना को गलत मानता है
कांग्रेस नेता ने कहा कि इंदिरा और राजीव गांधी के समय में कांग्रेस में आपको आलोचना करने का अधिकार था। वे लोग आलोचना का बुरा नहीं मानते थे, लेकिन आज का कांग्रेस नेतृत्व आलोचना को बुरा मानता है। जो लोग कांग्रेस छोड़कर चले गए हैं, वे सभी मेरे नेतृत्व में काम करना चाहते थे, लेकिन अब मैं कश्मीर कांग्रेस का चीफ नहीं बनना चाहता। मैं राजनीति छोड़ देता, लेकिन अपने लोगों की वजह से इसमें हूं।
कश्मीर में ठप हो गई हैं राजनीतिक गतिविधियां
कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं के समूह जी-23 में शामिल आजाद ने कहा कि कश्मीर में राजनीतिक गतिविधियां पूरी तरह ठप हो गई हैं। पिछले दो सालों मे कश्मीरी लोगों के बीच संपर्क टूट गया है। धारा 370 हटने के बाद हजारों लेागों को जेल भेज दिए गए, जो बाहर थे उन्हें राजनीति करने की इजाजत नहीं दी गई। मैनें सभी को जगाने का काम किया है।
कछुए की चाल चलने की आदत नहीं
गुलाम नबी ने कश्मीर कांग्रेस अध्यक्ष से मुलाकात न करने के सवाल पर कहा कि मेरे लिए सभी कांग्रेसी हैं। मगर जब मैं जम्मू और कश्मीर जाता हूं तो मैं केवल कांग्रेस या एक तबके की बात नहीं करता। उन्होंने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के बारे में कहा कि कुछ लोगों को कम काम करने की आदत होती है, लेकिन मुझे ज्यादा काम करने की आदत है। मैं कछुए की चाल नहीं चल सकता। एक दिन में 16 बैठकें करने का रिकॉर्ड भी मेरे नाम है।