सार
स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी ने आरएसएस की 100 साल की सेवा की तारीफ की तो कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद ने इसे भारतीय तालिबान करार दिया। उन्होंने कहा कि आरएसएस कभी स्वतंत्रता संग्राम में शामिल नहीं हुआ और फंडिंग पर भी सवाल उठाया। भाजपा-आरएसएस पर इतिहास तोड़ने-मरोड़ने का आरोप लगाते हुए उन्होंने फजलुल हक और श्यामा प्रसाद मुखर्जी को विभाजन का जिम्मेदार बताया।
स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालकिले से राष्ट्र के नाम संबोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को 'दुनिया का सबसे बड़ा सेवा संगठन' बताते हुए उसकी 100 साल की सेवा को सराहा। पीएम ने कहा कि व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण की भावना के साथ आरएसएस ने समाज और देश की भलाई के लिए काम किया है। लेकिन इस बयान पर कांग्रेस नेता और पूर्व राज्यसभा सदस्य बीके हरिप्रसाद ने तीखा हमला बोला है और आरएसएस को भारतीय तालिबान बताया है।
बीके हरिप्रसाद ने कहा कि आरएसएस देश की शांति भंग करने का काम कर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर सवाल उठाते हुए कहा कि "वे लालकिले से ऐसे संगठन की प्रशंसा कर रहे हैं जो कभी स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा ही नहीं रहा। यह शर्मनाक है कि आरएसएस एक पंजीकृत संगठन भी नहीं है और हमें यह तक नहीं पता कि उन्हें फंडिंग कहां से मिलती है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी एनजीओ को भारत में काम करने के लिए संविधान के तहत पंजीकरण कराना अनिवार्य है, लेकिन आरएसएस आज तक ऐसा नहीं कर पाया।
भाजपा पर लागया इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने का आरोप
कांग्रेस नेता ने भाजपा और आरएसएस पर इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ये दोनों संगठन इतिहास के सबसे बड़े मास्टर हैं। हरिप्रसाद ने दावा किया कि बंगाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री एके फजलुल हक ने सबसे पहले विभाजन का प्रस्ताव रखा था और जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी भी इसमें शामिल थे। उन्होंने आगे कहा कि "जिन्ना और सावरकर भी अलग-अलग धर्मों के लिए अलग राज्य के पक्षधर थे। आज भाजपा और आरएसएस इस जिम्मेदारी को कांग्रेस पर थोपने की कोशिश कर रहे हैं।
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ओवैसी का भी आरएसएस पर हमला
इससे पहले एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी आरएसएस पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि आरएसएस कभी स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल नहीं हुआ और यह संगठन उन स्वतंत्रता सेनानियों से ज्यादा नफरत करता था जिन्होंने अंग्रेजों से संघर्ष किया। ओवैसी ने आरोप लगाया कि आरएसएस हमेशा "समावेशी राष्ट्रवाद" का विरोध करता रहा है और उसकी विचारधारा समाज को बांटने वाली है।
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आरएसएस का 100 साल का सफर और विवाद
गौरतलब है कि आरएसएस की स्थापना 25 सितंबर 1925 को हुई थी। संगठन का दावा है कि उसने शिक्षा, सामाजिक सुधार और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के लिए काम किया है। लेकिन अक्सर इसे सांप्रदायिक राजनीति से जोड़कर आलोचना का सामना करना पड़ा है। अब प्रधानमंत्री मोदी की खुली सराहना और कांग्रेस के तीखे हमले ने इस संगठन को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है।