कांग्रेस ने सोमवार को महंगी दवाओं को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि देश भर में मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है, फिर भी प्रधानमंत्री, नीरो की तरह, अपनी ही धुन में मस्त हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि मोदी के लिए 'झोला उठाकर जाने' का समय तेजी से आ रहा है। रमेश ने अपने एक्स हैंडल पर एक मीडिया रिपोर्ट शेयर करते हुए ये बातें कहीं। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अस्पतालों में दवाओं की कीमतों की वजह से मरीजों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है। साथ ही, उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन द्वारा मेडिकल कॉलेजों और निजी अस्पतालों की फार्मेसियों के निरीक्षण में दवाओं की खरीद लागत और पैकेजिंग पर छपी अधिकतम खुदरा कीमत (एमआरपी) के बीच भारी अंतर पाया गया है।
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क्या है दवाओं की कीमत?
रमेश ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि जनता से लूट इस कदर मची है कि 74 रुपये का इंजेक्शन 4,980 रुपये में मिल रहा है। उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर मरीजों से 67 गुना ज्यादा वसूली की जा रही है। कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी की एक दवा की 21 दिन की खुराक करीब 58,000 रुपए की है। यानी सालाना खर्च करीब 10 लाख रुपए तक पहुंचता है।
सवाल सिर्फ एक दवा की कीमत का नहीं, 12 साल से सत्ता में बैठी सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं का है। उन्होंने कहा कि पेटेंट कानून की धारा 92 और 100 में सार्वजनिक हित और सरकारी उपयोग के लिए रास्ते मौजूद हैं। फिर भी मरीजों को राहत क्यों नहीं दी गई है ?
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केरल हाई कोर्ट ने क्या कहा?
केरल हाईकोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कोर्ट ने साफ किया है कि पेटेंट एक्ट की धारा 100 के तहत सरकार पेटेंट वाली जीवनरक्षक दवा का उत्पादन या अधिकृत उत्पादन कराकर उसे जरूरतमंद मरीजों को गैर-वाणिज्यिक आधार पर उपलब्ध करा सकती है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि जब कानून में प्रावधान मौजूद है और हाईकोर्ट ने उसका रास्ता भी स्पष्ट कर दिया है, तो मोदी सरकार बताए कि जीवनरक्षक दवाएं अब भी मरीजों की पहुंच से बाहर क्यों हैं?
मोदी सरकार बताए, जब कानून मरीजों को राहत देने का रास्ता देता है, तो उस रास्ते पर आगे बढ़ने में देरी क्यों हो रही है? कांग्रेस नेता ने पीएम मोदी पर सवाल किया कि मरीजों के लिए सस्ती दवा कब सुनिश्चित होगी? नहीं तो जैसा आपने स्वयं कहा था, झोला उठाने का समय जल्दी आ रहा है।