उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में सरकार बनाने के बाद से ही कांग्रेस की तुलना में एनसीपी को ज्यादा महत्व मिल रहा है। उद्धव ठाकरे और एनसीपी प्रमुख शरद पवार कई बार बंद कमरे में कोई निर्णय ले लेते हैं जिसकी कांग्रेस मंत्रियों तक को खबर नहीं होती। कांग्रेस के मंत्री इस पर अपना विरोध भी व्यक्त कर चुके हैं। इन सब के बीच हाल के दिनों में उद्धव सरकार की कार्यपद्धति में भी काफी बदलाव आया है।
कंगना रणौत का ऑफिस तोड़े जाने और पूर्व नौसेना अधिकारी मदन शर्मा की पिटाई के मामले में कांग्रेस बैकफुट पर है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री कहते हैं कि मुख्यमंत्री ठाकरे मंत्रियों से जल्दी बात नहीं करते। मौजूदा परिस्थिति में कांग्रेस के अनुभवी मंत्री काफी सहयोग दे सकते हैं। इसलिए कांग्रेस सत्ता में रहकर भी कुछ नहीं कर पा रही है। अगर राहुल गांधी पार्टी के अध्यक्ष होते तो महाराष्ट्र में कांग्रेस की हैसियत कुछ और होती।
राउत के बाबरी मस्जिद तोड़ने वाले बयान से भी खफा हैं नेता
शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत के बाबरी मस्जिद तोड़ने वाले बयान से भी कांग्रेस के नेता खफा हैं। कंगना ने ऑफिस तोड़े जाने पर ट्वीट कर शिवसेना को बाबर सेना कहा था। इसके बाद संजय राउत ने कहा था कि शिवसेना को बाबर सेना कहने वाले जान लें कि हम वही लोग हैं जिन्होंने बाबरी मस्जिद तोड़ी थी। अब कांग्रेस के मुस्लिम नेताओं का कहना है कि कल जब शिवसेना नेता मंच से यह बात कहेंगे तो कांग्रेस क्या जवाब देगी।
विभागीय निधि को लेकर भी कांग्रेस के साथ हो रहा भेदभाव
महाविकास आघाड़ी सरकार में कांग्रेस को तीसरे दर्जे की वरीयता प्राप्त है। इसलिए विभागीय निधि को लेकर भेदभाव की बातें सामने आई हैं। हाल ही में राज्य विधानमंडल का दो दिवसीय मानसून सत्र आयोजित हुआ था। सत्र में 29 हजार 84 करोड़ की पूरक मांग मंजूर की गई। लेकिन इसमें शिवसेना और एनसीपी के मंत्रियों वाले विभागों पर मेहबानी दिखाई गई। इस पर कांग्रेस के नेता कहते हैं कि वैसे भी उन्हें कम महत्व वाले विभाग मिले हैं। ऐसे में उन्हें कहां तवज्जो मिल पाएगी।
शिवसेना के खिलाफ अकेले मुखर नेता हैं संजय निरूपम
महाराष्ट्र में संजय निरूपम एकमात्र ऐसे नेता हैं जो शिवसेना और उद्धव ठाकरे सरकार के खिलाफ मुखर रहते हैं। उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत मौत के मामले से लेकर कंगना का ऑफिस तोड़े जाने पर भी अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। उन्होंने शिवसेना को गुंडा पार्टी तक कहा है। लेकिन पार्टी के अन्य नेता या तो उद्धव सरकार के समर्थन में ही ढपली बजाते दिखाई देते हैं या फिर चुप्पी साधे रहते हैं।