देश की विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी उत्तरप्रदेश में गठबंधन के घोड़े के सवार पर है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को यह कहने में गुरेज नहीं है कि बसपा 50 सीटें देने के लिए तैयार थी। हरियाणा से आने वाले कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का दावा है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल-अखिलेश के बीच में सब तय हो चुका है। बुधवार को दोनों नेताओं में बात हो सकती है और बृहस्पतिवार को गठबंधन की घोषणा हो सकती है।
सूत्र का कहना है कि समाजवादी पार्टी(अखिलेश) 103 सीट कांग्रेस और अन्य को दे रही है। इसमें से 80-85 सीट कांग्रेस अपने पास और शेष सीटें राष्ट्रीय लोकदल, जद समेत अन्य को दे सकती है।
यह स्थिति तब है जब अभी समाजवादी पार्टी में घमासान मचा है और इसका निर्णयक मोड़ लेना बाकी है। रहा सवाल बसपा का तो मायावती ने पार्टी के 403 उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर दी है।
अखिर कहां है कांग्रेस?
यह पार्टी की विपन्न स्थिति को बयां कर रही है। पार्टी के एक अन्य रणनीतिकार ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि इस समय पार्टी अकेले दम पर चुनाव लड़ती है तो काफी घाटे में रहेगी। वहीं समाजवादी पार्टी या बसपा के साथ गठबंधन की दशा में सम्मानजनक स्थिति मिलने के आसार हैं।
हालांकि सूत्र का मानना है कि सोनिया गांधी के वाराणसी दौरे के दौरान कांग्रेस के प्रति जनता का लगाव उभरा था। पार्टी इसे नहीं भुना सकी। इसके बाद राहुल गांधी की किसान यात्रा के दौरान पार्टी के कार्यकर्ताओं में चेतना दौड़ गई थी। प्रियंका के प्रचार करने की रणनीति से भी बड़ा फायदा होता दिखाई दे रहा था, लेकिन गठबंधन की चर्चा शुरू करके पार्टी ने खुद के दुर्दिन बुला लिए। अब गठबंधन के सिवा कोई चारा नहीं है।
गठबंधन में है कई पेंच
सपा(अखिलेश)-कांग्रेस, रालोद और अन्य के गठबंधन में हालांकि कई पेंच है। कहा जा रहा है कि राष्ट्रीय लोकदल की तरफ से जयंत चौधरी बात कर रहे हैं। जबकि रालोद के उच्चपदस्थ नेता का कहना है कि तीन-चार महीने पहले शिवपाल यादव के मिलकर जाने के बाद से गठबंधन पर कांग्रेस या सपा की तरफ से कोई बात नहीं कर रहा है। जद(यू) के केसी त्यागी का भी यही कहना है। रालोद के नेता तो यहां तक कह रहे हैं कि कोई एक-दो दिन में गठबंधन अंतिम रूप थोड़े ले लेगा।
-दूसरी बड़ा पेंच समाजवादी पार्टी के नेताओं के खिलाफ जांच के लिए सीबीआई के पास अटके मामले हैं। यादव सिंह प्रकरण को भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सीबीआई ने भी हाल में प्रेसवार्ता करके कहा था कि अभी उसकी जांच पूरी नहीं हुई है।
-वकील विश्वनाथ चतुर्वेदी द्वारा दायर आय से अधिक संपत्ति की शिकायत में भी मुलायम, अखिलेश समेत अन्य को वांछित बताया गया है। इस पर आगे की कार्रवाई शेष है। सत्ता के गलियारे से जुड़े सूत्र इसे भी समझौता और गठबंधन में अहम पेंच मान रहे हैं।