राहुल गांधी-शरद पवार (फाइल फोटो)
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कांग्रेस पार्टी ने जो प्लान बी तैयार किया है, उसमें सहयोगी या मित्र सामने होंगे। यानी केंद्र में सरकार बनाने की कवायद कांग्रेस नहीं करेगी, बल्कि वह दूसरे दलों को समर्थन देगी। यह स्थिति तभी संभव होगी, जब कांग्रेस की सीटों का ग्राफ 150 से कम रहता है। कांग्रेस का पहला प्रयास यह होगा कि दक्षिण भारत के किसी नेता को समर्थन दिया जाए। दूसरा, जब सरकार के गठन या पीएम पद को लेकर कोई भी सहमति नहीं बनती है तो उस स्थिति में सपा-बसपा गठबंधन के नेताओं का साथ दिया जा सकता है।
यहां पर बता दें कि प्लान बी में यह बात स्पष्ट कर दी गई है, सपा-बसपा का समर्थन केवल उसी स्थिति में किया जाएगा, जब इन दोनों दलों को यूपी में 60 से ज्यादा सीटें मिलें। कांग्रेस पार्टी की ओर से यूपीए के दो नेताओं ने केरल और तेलंगाना के मुख्यमंत्री, जो कि तीसरा मोर्चा खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं, उनसे बातचीत की है।
मंगलवार को कांग्रेस पार्टी ने अंदरखाने बातचीत का दौर जारी रखा
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेलुगू देशम पार्टी के मुखिया एन. चंद्रबाबू नायडू ने मंगलवार को भाकपा नेता जी सुधाकर रेडी, डी राजा, राकांपा प्रमुख शरद पवार, एलजेडी नेता शरद यादव, माकपा महासचिव सीताराम येचुरी और वाईएसआर कांग्रेस के प्रमुख से बात की है।
दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी के नेता पी चिदंबरम, गुलाम नबी आजाद, अहमद पटेल, एमपी के मुख्यमंत्री कमलनाथ और राजस्थान अशोक गहलोत ने भी करीब 17 दलों के नेताओं के साथ व्यक्तिगत तौर पर या टेलीफोन पर बातचीत की है।
बुधवार को शरद यादव, आरजेडी, टीएमसी और दक्षिण भारत की कई पार्टियों के नेताओं के साथ बातचीत करेंगे। कांग्रेस ने चंद्रबाबू नायडू और अहमद पटेल को यह जिम्मेदारी सौंपी है कि 23 मई को सोनिया गांधी के नेतृत्व में होने वाली यूपीए की बैठक में सभी सहयोगी व मित्र दल शामिल हों।