अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों में तालमेल के सवाल पर कांग्रेस बंगाल में भारी असमंजस में है। वह तय नहीं कर पा रही है कि वह तृणमूल कांग्रेस और उसकी अध्यक्ष ममता बनर्जी के खिलाफ हमलावर रुख अपनाए या फिर लोकसभा चुनावों के बाद किसी को बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में तृणमूल के समर्थन की अहमियत को ध्यान में रखते हुए नरम बनी रहे।
फिलहाल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने प्रदेश नेतृत्व को ममता के खिलाफ नरमी बरतने की सलाह दी है। लेकिन प्रदेश के कई नेताओं की दलील है कि तृणमूल कांग्रेस के प्रति नरमी से पार्टी को कोई फायदा नहीं होगा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सोमेन मित्र और पूर्व अध्यक्ष अधीर चौधरी समेत तमाम नेता इस बार यहां अकेले ही लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं। दिल्ली में हाल में हुई बैठक के दौरान उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को भी यह बात बता दी है।
दरअसल कांग्रेस यहां शुरू से ही कभी माकपा तो कभी तृणमूल कांग्रेस की पिछलग्गू रही है। वर्ष 2011 में पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस के साथ मिल कर चुनाव लड़ा था और सरकार में शामिल थी। लेकिन अगले साल ही केंद्र की मनमोहन सिंह सरकार से तृणमूल के समर्थन वापस लेने के बाद यहां भी दोनों दलों की दोस्ती टूट गई थी।
उसके बाद कांग्रेस के कई नेता व विधायक तृणमूल में शामिल हो गए थे। चौधरी कहते हैं कि वर्ष 2016 के चुनावों में कांग्रेस के टिकट पर जीतने वाले कई लोग अब तृणमूल में शामिल हो चुके हैं। उनका आरोप है कि तृणमूल नेतृत्व ने डरा-धमकाकर उन नेताओं को कांग्रेस से नाता तोड़ने पर मजबूर किया है।