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लोकसभा की जमीनी हकीकत जानकर चुनावी ब्रह्मास्त्र बनाने चली हैं कांग्रेस और माकपा

Sun, 19 Aug 2018 01:04 PM IST
भाषा, कोलकाता
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देश में अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले माकपा और कांग्रेस ने राज्य में जमीन-स्तर की स्थिति का आकलन करना शुरू किया है। गौरतलब है कि दोनों पार्टियों के जनाधार में लगातार कमी आ रही है। राज्य में कथित रूप से ‘सत्तारूढ़ तृणकां द्वारा नेताओं को तोड़ने और आतंक का माहौल बनाने’ एवं भाजपा के मुख्य विपक्षी बनने के कारण राज्य में मुश्किल घड़ी का सामना कर रहे माकपा और कांग्रेस को उम्मीद है कि इस तरह के मूल्यांकन से उन्हें पश्चिम बंगाल में उनकी ‘जीतने की क्षमता’ के बारे में समझ बेहतर होगी और सभी 42 लोकसभा सीटों पर ताकत और कमजोरियों के बारे में समझने में बेहतर मदद मिलेगी।

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प्रदेश में 2016 विधानसभा चुनाव के बाद से हाल के पंचायत चुनावों और उप चुनावों में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस एक स्पष्ट विजेता के रूप में उभरी है लेकिन राज्य में कांग्रेस एवं माकपा को मुख्य विपक्षी दल बनने में भाजपा अड़ंगा बनी हुई है।

माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य हन्ना मोल्ला ने कहा कि पश्चिम बंगाल समेत सभी राज्य इकाइयों को अगली केंद्रीय समिति की बैठक में अपनी संगठनात्मक आधार रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा गया है। इसके बाद राज्यवार राजनीतिक रणनीति के बारे में चर्चा की जाएगाी।
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मोल्ला ने ‘पीटीआई भाषा’ को बताया, ‘‘सभी राज्य इकाइयों से उनकी संगठनात्मक आधार रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा गया है जिसमें सीटवार स्थिति भी शामिल होगी। इसके बाद हम तैयारी पर अपनी रणनीति पर चर्चा करेंगे।’’

राज्य में 42 लोकसभा सीटों में से इस समय तृणमूल कांग्रेस के पास 34, भाजपा के पास दो, कांग्रेस के पास चार और माकपा के पास दो सीटें हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस नेतृत्व, जमीनी स्तर पर स्थिति के बारे में अपने जिला स्तर से जानकारी एकत्र कर रही है।

बंगाल की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर राज्य कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा, ‘‘हमारा लक्ष्य उन चार सीटों को बनाए रखना और उनकी संख्या को आगे बढ़ाने का है जो इस समय हमारे पास है।’’

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