बुधवार एक अगस्त को ममता बनर्जी ने यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी से भेंट किया था। ममता पहले मंगलवार से सोनिया गांधी से मिलने का समय मांग रही थी। मंगलवार (31 जुलाई) को वह शरद पवार से भी मिलीं। विपक्ष के कुछ और नेताओं से भी उनकी भेंट हुई। सबकी राय यही थी कि वह भाजपा को एनआरसी के मुद्दे को कम से कम उछालने का अवसर दें। सूत्र बताते हैं कि शरद पवार ने भी ममता को कुछ सहमत करने की कोशिश की।
कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने शीर्ष स्तर से मिले निर्देश के बाद ममता बनर्जी के गृह युद्ध और देश में रक्तपात होने जैसे बयान से किनारा कर लिया। बताते हैं कि सोनिया-राहुल-ममता की मुलाकात में भी इस विषय पर चर्चा हुई और ममता बनर्जी राय से सहमत नजर आईं। माना जा रहा है कि 11 अगस्त को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान इस सहमति का असर देखने को मिल सकता है।