केरल में चुनाव नतीजों से पहले सियासी माहौल गर्म हो गया है, लेकिन इस बार मुकाबला केवल विपक्ष और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर भी दिखाई दे रहा है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ में मुख्यमंत्री पद को लेकर शुरू हुई अंदरूनी खींचतान ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
राज्य में 9 अप्रैल को मतदान हो चुका है और अब 4 मई को नतीजों का इंतजार है। करीब 10 साल बाद सत्ता में वापसी की उम्मीद लगाए यूडीएफ खेमे में उत्साह तो है, लेकिन इसी बीच नेतृत्व को लेकर उठी बहस ने माहौल असहज कर दिया है।
इसी बीच कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर खुलकर दावेदारी सामने आने लगी है। वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला, विपक्ष के नेता वी डी सतीशान और संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल के समर्थक सार्वजनिक रूप से अपने-अपने नेता को मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर रहे हैं।
यह बहस चुनाव परिणाम आने से पहले ही शुरू हो जाने से पार्टी नेतृत्व असहज स्थिति में है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की खुली बयानबाजी से मतदाताओं के बीच गलत संदेश जा सकता है। वरिष्ठ मीडिया आलोचक एम एन करासेरी ने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि सत्ता मिलने से पहले पद की लड़ाई जनता का भरोसा कमजोर कर सकती है।
दूसरी ओर, वाम दलों ने इस पूरे विवाद पर चुप्पी साध रखी है और एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की है। इसके उलट कांग्रेस में गुटबाजी एक बार फिर खुलकर सामने आने से कार्यकर्ताओं और सहयोगी दलों में बेचैनी बढ़ गई है। ऐसे में चुनाव नतीजों से पहले यूडीएफ के सामने सबसे बड़ी चुनौती सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि घर के भीतर की लड़ाई बनती दिख रही है।