जयराम रमेश ने याद दिलाई टाइमलाइन
- 2006 में एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी ऑफ इंडिया और इंडियन एकेडमी ऑफ साइंसेज के वैज्ञानिकों ने एक उपकरण के साथ सौर वेधशाला के कॉन्सेप्ट का प्रस्ताव रखा था।
- मार्च 2008 में वैज्ञानिकों ने इसरो के साथ इस प्रस्ताव को साझा किया।
- दिसंबर 2009 में इसरो ने एक उपकरण के साथ आदित्य-1 परियोजना को मंजूरी दी।
- अप्रैल 2013 में पूर्व अध्यक्ष यूआर राव के हस्तक्षेप के बाद एक घोषणा की, जिसमें वैज्ञानिक समुदाय से अधिक वैज्ञानिक उपकरणों (पेलोड) के प्रस्तावों की मांग की गई थी।
- जून 2013 में इसरो ने प्राप्त वैज्ञानिक प्रस्तावों की समीक्षा की।
- जुलाई 2013 में इसरो ने आदित्य-1 मिशन के लिए सात पेलोड का चयन किया। इस मिशन का अब नाम बदलकर आदित्य एल1 मिशन कर दिया गया है।
- नवंबर 2015 में इसरो ने औपचारिक रूप से आदित्य-एल 1 को मंजूरी दी।
सूर्य मिशन ‘आदित्य एल-1’ को प्रक्षेपित किया
इससे पहले चंद्रयान-3 की सफलता के बाद भारत ने शनिवार को अपने पहले सूर्य मिशन ‘आदित्य एल-1’ को प्रक्षेपित किया। प्रक्षेपण भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के रॉकेट पीएसएलवी-सी57 से किया गया। पीएसएलवी-सी57 द्वारा आदित्य-एल1 का प्रक्षेपण सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। पीएसएलवी ने सैटेलाइट को ठीक उसकी इच्छित कक्षा में स्थापित कर दिया है और अब भारत की पहली सौर वेधशाला ने सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंजियन (एल1) बिंदु के गंतव्य के लिए अपनी यात्रा शुरू कर दी है। इसरो ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ट्वीट कर यह जानकारी दी।