कांग्रेस फिलहाल राज्यों में हार की समीक्षा से अधिक इस बात पर फोकस कर रही है कि उसे किस बूथ पर कितने वोट मिले हैं। राज्यों के प्रभारियों को अपनी रिपोर्ट 7 जून तक अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी को सौंपनी है। बूथ लेवल के नतीजे सामने आने के बाद पार्टी अपने संगठनात्मक ढांचे में बदलाव के साथ वहां नया संगठन और नेतृत्व तैयार करेगी।
कांग्रेस नेतृत्व की ओर से प्रभारियों को इस बात के निर्देश दिए गए हैं कि संबंधित राज्यों में बैठक कर नेताओं की अपेक्षा कार्यकर्ताओं से हार के कारणों पर चर्चा करें। प्रभारियों से फिलहाल कोई रिपोर्ट तो नहीं मांगी गई है लेकिन उन्हें उन कारणों का पता लगाना होगा जिससे आने वाले समय में नतीजों को बदला जा सके।
पूरे देश में कांग्रेस उम्मीदवारों के हार का अंतर बड़ा है। इसी को ध्यान में रखकर पार्टी बूथ लेवल पर उसे मिले वोट की पड़ताल करना चाहती है। पार्टी के वरिष्ठ प्रभारी का कहना है कि बूथ पर मिले वोट से हमें अपनी ताकत और समर्थकों का अंदाजा है।
साथ ही उन बूथ का भी पता चलेगा जहां पार्टी कमजोर है और उसे मजबूत कैसे बनाया जा सकता है। इस प्रक्रिया से बूथ लेवल की कमेटियों की सक्रियता का भी पता चल सकेगा। बूथ पर नए सिरे से संगठनात्मक ढांचा बनाने में भी मदद मिलेगी।