कांग्रेस पार्टी गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा और कपिल सिब्बल की अगुवाई वाले असंतुष्ट जी-23 समूह में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र हुड्डा के अलावा जन नेता कौन हैं? उड़ीसा कांग्रेस के एक बड़े नेता ने यह सवाल उठाया है। उनके सवाल पर कांग्रेस के पूर्व महासचिव और दिल्ली के पूर्व प्रभारी ने भी साथ दिया है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने भी कहा कि गुलाम नबी आजाद जैसे वरिष्ठ नेता से इस तरह के व्यवहार की उम्मीद नहीं थी।
जी-23 समूह में शामिल पूर्व केन्द्रीय मंत्री और सांसद मनीष तिवारी ने अमर उजाला से कहा कि जम्मू में जो कहना था, कह दिया। अब इस बारे में कुछ नहीं दोहराना है। रहा सवाल आनंद शर्मा या फिर अधीर रंजन के बयानों पर प्रतिक्रिया देने का, तो वह कुछ नहीं बोलेंगे। इस पर जो भी कहना होगा, अपने-अपने बयान पर अधीर रंजन चौधरी और आनंद शर्मा ही बोलेंगे।
हालांकि अधीर रंजन चौधरी और आनंद शर्मा के बीच विरोधाभासी बयान आने के बाद कांग्रेस महासचिव तारिक अनवर ने आनंद शर्मा को सलाह दी है। तारिक अनवर का कहना है कि आनंद शर्मा को ट्वीट करने के बजाय इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के मामले में अधीर रंजन चौधरी से बात कर लेनी चाहिए थी।
यूपीए सरकार में केन्द्रीय मंत्री रहे एक नेता का कहना है कि वह मीडिया में चर्चा करके खुद को छोटा नहीं करना चाहते, लेकिन वह पार्टी फोरम पर गुलाम नबी आजाद और आनंद शर्मा के व्यवहार को लेकर सवाल पूछेंगे। वह जानना चाहेंगे कि क्या ये दोनों बड़े नेता पार्टी को ही विधानसभा चुनाव के दौरान नुकसान पहुंचाना चाहते थे? किस नैतिकता के तहत उन्होंने जम्मू-कश्मीर में पार्टी के नेतृत्व को कठघरे में खड़ा किया और सत्ता पक्ष को फायदा पहुंचाने वाली भाषा बोली। वरिष्ठ सूत्र का कहना है कि अब्बास सिद्दीकी की पार्टी आईएसएफ को गठबंधन में शामिल करना बिना कांग्रेस के नेतृत्व की सहमति के संभव नहीं है।
कांग्रेस पार्टी के एक प्रवक्ता का जवाब सुनिए। कहते हैं कि हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र हुड्डा को छोड़कर गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल के रास्ते पर कांग्रेस का कोई जन नेता नहीं है। यहां तक कि जम्मू-कश्मीर में वरिष्ठ नेताओं के सामने आने के बाद उन्हें पार्टी के अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं का समर्थन मिलने में भी मुश्किल आएगी।
सूत्र का कहना है कि भूपेन्द्र हुड्डा हरियाणा में एक क्षेत्र में अपनी खास पकड़ रखते हैं। उन्हें जाटों का समर्थन हासिल है। लेकिन इसके साथ-साथ हरियाणा में अन्य जाट नेता भी हैं। कांग्रेस नेता का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में गुलाम नबी आजाद कोई खास पकड़ नहीं रखते। उनके राजनीतिक जीवन का अधिकांश हिस्सा राज्यसभा में ही बीता है।