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चुनावी आईना: अपने ही नेताओं की वजह से कांग्रेस की ऐसी हुई हालत, मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर किया गया था आगाह

Wed, 20 Mar 2024 06:36 AM IST
जलज मिश्रा कालीचरण, नई दिल्ली

सार

किताब नेहरू मिथक और सत्य के मुताबिक, नेहरू 3 जून, 1949 को मुख्यमंत्रियों को लिखे पत्र में कहते हैं...इस समय देश के बहुत से भागों में कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। दुर्भाग्य की बात है कि देश के ज्यादातर इलाकों में कांग्रेसी अपनी वह भूमिका नहीं निभा रहे हैं, जो उन्हें निभानी चाहिए थी।
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कांग्रेस झेडा - फोटो : PTI
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विस्तार
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कांग्रेस आज जिस स्थिति में पहुंच गई है, उसके लिए काफी हद तक वह खुद ही जिम्मेदार है। पंडित जवाहरलाल नेहरू जैसे बड़े नेता की बार-बार चेतावनी के बाद भी पार्टी ने सुधार की दिशा में कोई कदम नहीं उठाए। जनमानस के मुद्दों को पुरजोर तरीके से उठाने, विपक्ष की कमजोरियों को भुनाने, जनाधार वाले अपने बड़े नेताओं को पार्टी में सम्मान देने, जमीन पर उतरकर काम करने और लोगों के बीच अपनी बात पहुंचाने में पार्टी पूरी तरह नाकाम रही।

2014 व 2019 में कांग्रेस को बुरी शिकस्त झेलनी पड़ी। इस हार के पीछे प्रवृत्तियां वहीं रहीं, जिन्हें लेकर नेहरू शुरुआत से ही बार-बार सचेत करते थे। कांग्रेस के हालात देखकर 1949 में मुख्यमंत्रियों को लिखा गया नेहरू का खत आज भी मौजूं हो जाता है।

किताब नेहरू मिथक और सत्य के मुताबिक, नेहरू 3 जून, 1949 को मुख्यमंत्रियों को लिखे पत्र में कहते हैं...इस समय देश के बहुत से भागों में कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। दुर्भाग्य की बात है कि देश के ज्यादातर इलाकों में कांग्रेसी अपनी वह भूमिका नहीं निभा रहे हैं, जो उन्हें निभानी चाहिए थी। आगे नेहरू लिखते हैं...कांग्रेस जमीनी स्तर पर निजी ताल्लुकात खो बैठी है। नतीजा यह निकलता है कि लोग केवल सरकार के विरोधियों और आलोचकों को संपर्क में आते हैं, जबकि कांग्रेस उन्हें अब सिर्फ एक सरकारी मशीनरी की तरह दिखती है। इसलिए, अब यह बहुत जरूरी है कि समस्या के इस पहलू पर हमारे मंत्री और कांग्रेस के साथी तुरंत गौर करें।

संवाद कायम करने और जवाब देने में रही नाकाम

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1949 से 2019 तक का सफर बताता है कि नेहरू कांग्रेसियों को सरकारी मशीन बनकर जमीन से कट जाने के प्रति आगाह करते रहे, लेकिन वे सलाह नजरअंदाज करते रहे। जनता से वैसा संवाद स्थापित नहीं कर पाए, जैसा कांग्रेस के विरोधी करते रहे। कांग्रेस अपने खिलाफ प्रचार का जवाब देने में भी पीछे रही, जो 1989 में राजीव गांधी और 2014 में मनमोहन सिंह की हार की बड़ी वजह बनी।

अब भी जोश गायब
नेहरू 4 जून, 1949 को मुख्यमंत्रियों को लिखे एक अन्य पत्र में कहते हैं...कांग्रेस के लोग सुस्त हो गए हैं। जनता को हल्के में ले रहे हैं, जो हमेशा घातक है। हम पुराने नाम और प्रतिष्ठा के बल पर आगे बढ़ रहे हैं, पर पुरानी पूंजी हमेशा नहीं बनी रहेगी। बिना कमाए संचित पूंजी पर जीना हमें दिवालियेपन के कगार पर ले जाएगा। और आज...कांग्रेस ऐसी ही स्थिति में पहुंच गई है। अपनी हालत सुधारने के लिए उसने राहुल गांधी को अध्यक्ष तक बनाया। पर, वे उस मुहावरे को नहीं खोज सके जो पार्टी की लोकप्रियता लौटा सके। पार्टी में अब जोश तक गायब हो चुका है। पंडित जवाहरलाल नेहरू का कहना था कि लोग केवल सरकार के विरोधियों और आलोचकों के संपर्क में आते हैं, जबकि कांग्रेस उन्हें सिर्फ सरकारी मशीनरी की तरह दिखती है।

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