पूर्वी भारत के चार राज्यों बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा ने वर्ष 2019 में ऐसा जनादेश दिया, जिसने सारे सियासी समीकरण ध्वस्त कर दिए थे। प. बंगाल व ओडिशा में तो भाजपा को अप्रत्याशित सफलता मिली और पार्टी पहली बार अपने दम पर तीन सौ सीटों के पार पहुंच गई। इस बार के चुनाव में इसी पूर्वी भारत में भाजपा की संभावना और कांग्रेस की उम्मीदों के साथ आधा दर्जन क्षेत्रीय दलों का भविष्य भी छिपा हुआ है।
इन चार राज्यों में लोकसभा की 117 सीटें हैं। बीते चुनाव में भाजपा को 2014 के मुकाबले 18 सीटें अधिक 55 सीटें हासिल हुई थीं। वहीं, एनडीए 77 सीटें पाने में सफल रही। इस जनादेश ने राजग और विपक्ष के बीच सीटों के मामले में कभी न पट सकने वाली बड़ी खाई पैदा कर दी थी। बिहार में लालू प्रसाद यादव की पार्टी राजद और झारखंड में कांग्रेस खाता तक न खोल सकी। वहीं, प. बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल को 12 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा।
अबकी प. बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल और ओडिशा में नवीन पटनायक के नेतृत्व वाला बीजद अपने दम पर मैदान में हैं। वहीं, बिहार में राजद तो झारखंड में पूर्व सीएम हेमंत सोरेन की अनुपस्थिति में झामुमो विपक्षी गठबंधन की अगुवाई कर रहा है। बिहार में नीतीश कुमार (जदयू), जीतनराम मांझी (हम), उपेंद्र कुशवाहा (रालोसपा) व चिराग पासवान (लोजपा) एनडीए के लिए लामबंदी कर रहे हैं।
संदेशखाली ने बढ़ाई ममता की चिंता पटनायक सहानुभूति वोटों के सहारे
नीतीश गए तो जाति का मुद्दा हुआ कमजोर
सामाजिक न्याय की राजनीति की धुरी बिहार में बड़ा खेल हुआ है। विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद विपक्षी गठबंधन में शामिल जदयू की एनडीए में वापसी हो गई है। नीतीश के साथ छोड़ने से विपक्ष का जाति जनगणना व आरक्षण का मुद्दा कमजोर हुआ है।
कांग्रेस चुनौती देने की स्थिति में नहीं
जानिए कहां क्या है मुद्दा
प. बंगाल
तृणमूल फिर से बंगाल अस्मिता का दांव चल रही है। पार्टी 28 फीसदी मुसलमानों को साधे रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। भाजपा ने संदेशखाली में महिलाओं यौन उत्पीड़न, मुस्लिम तुष्टीकरण, भ्रष्टाचार और बदतर होती कानून व्यवस्था को मुद्दा बनाया है।
भाजपा की 16 सीटें बढ़ी
ओडिशा
बीजद का जोर पटनायक सरकार की उपलब्धियों पर है। पार्टी ने इसे भुनाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। भाजपा की उम्मीदें एंटी इन्कम्बेंसी पर टिकी हैं। पार्टी ब्रांड मोदी के सहारे बदलाव की बयार बहाने की कोशिश में लगी है।
एक से आठ पर पहुंची भाजपा
बिहार
विपक्ष सामाजिक न्याय व बेरोजगारी के साथ नीतीश के पालाबदल को मुद्दा बना रहा है। विपक्ष की कोशिश पिछड़ा वर्ग और मुसलमानों को साधने की है। भाजपा ने विकास का नारा देने के साथ महागठबंधन के खिलाफ कई क्षेत्रीय दलों को साधकर जातिगत समीकरण को साधने की कोशिश की है।
कांग्रेस 1, राजद का खाता न खुला
झारखंड
आदिवासी बाहुल्य राज्य में भाजपा ने जनसांख्यिकी में बदलाव, सोरेन सरकार के भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाया है। मुसलमानों की बढ़ती संख्या व भ्रष्टाचार में जेल गए हेमंत सोरेन के मामले का प्रचार कर रही है।
नतीजों में कोई बदलाव नहीं
वहीं, झामुमो, कांग्रेस, राजद गठबंधन की पूरी कोशिश मुख्यमंत्री रहते हेमंत सोरेन को आदिवासी होने के कारण जेल भेजे जाने की धारणा बनाने की है।